अग्नि-3 की ताकत और महत्व
DRDO द्वारा विकसित अग्नि-3 मिसाइल को परमाणु और पारंपरिक दोनों प्रकार के वॉरहेड ले जाने के लिए तैयार किया गया है। इसकी अधिकतम रेंज लगभग 3500 किलोमीटर है, जिससे पाकिस्तान का लगभग पूरा इलाका और चीन के कई बड़े शहर इसके निशाने में आते हैं। इस मिसाइल के सफल परीक्षण ने भारत की न्यूक्लियर डिटरेंस क्षमता और सामरिक शक्ति को मजबूती दी है।
मुख्य तकनीकी विशेषताएँ
ईंधन और चरण: यह दो-चरणीय ठोस ईंधन से चलती है।
लंबाई और वजन: लगभग 17 मीटर लंबी और 48–50 टन वजन वाली।
पेलोड: करीब 1.5 टन।
गति: उड़ान गति मैक-7 से मैक-8 के बीच।
सटीकता: टार्गेट हिट करने की क्षमता बहुत उच्च, CEP 40 मीटर से कम।
इतिहास और रणनीतिक प्रभाव
आपको बता दें की अग्नि-3 का पहला परीक्षण 2006 में हुआ था और तब से यह कई बार सफलतापूर्वक टेस्ट की जा चुकी है। यह अग्नि-4 और अग्नि-5 की तुलना में कम दूरी की मिसाइल है, लेकिन रणनीतिक दृष्टि से यह अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती है।
इस परीक्षण ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारत की मिसाइल तकनीक भरोसेमंद, सटीक और पूरी तरह ऑपरेशनल है। यह मिसाइल न केवल देश की सुरक्षा ढांचे को मजबूत करती है, बल्कि पड़ोसी देशों पर भी स्पष्ट संदेश देती है कि भारत अपनी सामरिक क्षमता में सक्षम है।

0 comments:
Post a Comment