अमेरिका का शक्ति प्रदर्शन, चीन से युद्ध की तैयारी? भारत भी सतर्क!

नई दिल्ली। अमेरिका ने अपने सैन्य ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा और रणनीतिक कदम उठाया है। पेंटागन ने मिसाइल उत्पादन को अभूतपूर्व स्तर तक बढ़ाने के लिए रक्षा क्षेत्र की दिग्गज कंपनी रेथियॉन सहित कई डिफेंस पार्टनर्स के साथ दीर्घकालिक फ्रेमवर्क समझौते किए हैं। इन समझौतों का लक्ष्य अगले सात वर्षों तक लगातार मिसाइलों के निर्माण की रफ्तार को तेज करना है, जिससे अमेरिका अपने हथियार भंडार को पहले से कहीं ज्यादा शक्तिशाली बना सके।

मिसाइल उत्पादन में ऐतिहासिक बढ़ोतरी

इन समझौतों के तहत अमेरिका की सबसे चर्चित टॉमहॉक क्रूज मिसाइल का उत्पादन सबसे ज्यादा सुर्खियों में है। रेथियॉन की योजना के अनुसार, टॉमहॉक मिसाइलों का सालाना निर्माण 50 से बढ़ाकर 1,000 से ज्यादा यूनिट किया जाएगा। यानी करीब 20 गुना की छलांग। इससे अमेरिकी सेना को लंबे समय तक लगातार और सटीक हमले करने की जबरदस्त क्षमता मिलेगी।

हवा में मार करने वाली मिसाइलों पर जोर

अमेरिका केवल जमीन पर हमला करने वाली मिसाइलों तक सीमित नहीं है। AIM-120 AMRAAM मीडियम-रेंज एयर-टू-एयर मिसाइलों का उत्पादन भी तेज किया जा रहा है। इनका सालाना लक्ष्य कम से कम 1,900 मिसाइलें तय किया गया है। ये मिसाइलें नाटो और नॉन-नाटो देशों के फाइटर जेट्स में इस्तेमाल होती हैं और NASAMS एयर डिफेंस सिस्टम का भी अहम हिस्सा हैं।

हाइपरसोनिक खतरों से निपटने की तैयारी

रेथियॉन की सबसे एडवांस मिसाइलों में शामिल SM-6 को लेकर भी बड़ा फैसला लिया गया है। यह मिसाइल रूसी किंझल और जिरकॉन जैसी हाई-स्पीड हाइपरसोनिक मिसाइलों को इंटरसेप्ट करने में सक्षम मानी जाती है। इसका सालाना उत्पादन 125 से बढ़ाकर 500 यूनिट तक पहुंचाने की योजना है। साफ है कि अमेरिका भविष्य के हाई-टेक युद्धों को ध्यान में रखकर अपनी वायु और समुद्री सुरक्षा को मजबूत कर रहा है।

चीन पर नजर, यूक्रेन और वैश्विक समीकरण

विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका का यह हथियार विस्तार केवल एक देश तक सीमित नहीं है। एक ओर चीन के साथ संभावित टकराव को देखते हुए अमेरिका अपनी सैन्य तैयारी बढ़ा रहा है दूसरी ओर यूक्रेन युद्ध में भी इन मिसाइलों की अहम भूमिका हो सकती है यूक्रेन की सेनाएं पहले से NASAMS सिस्टम और F-16 फाइटर जेट्स में AIM-120 मिसाइलों का इस्तेमाल कर रही हैं। हालांकि अमेरिका सीधे तौर पर इन मिसाइलों की सप्लाई नहीं कर रहा, लेकिन सहयोगी देश अलग-अलग पहल के तहत यूक्रेन के लिए ऑर्डर दे रहे हैं।

भारत समेत एशिया के देश क्यों हैं सतर्क 

अमेरिका का यह तेज़ हथियार विस्तार वैश्विक शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकता है। एशिया-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों के बीच भारत जैसे देश भी हालात पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं। हथियारों की यह दौड़ आने वाले वर्षों में अंतरराष्ट्रीय राजनीति और सुरक्षा रणनीतियों को नई दिशा दे सकती है। क्यों की चीन भी अपनी हथियार को तेजी से बढ़ा रहा हैं।

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