राडार की विशेषता
खरीदे जाने वाले राडार मित्र और शत्रु दोनों प्रकार के हवाई लक्ष्यों की निरंतर 3D निगरानी प्रदान करने में सक्षम होंगे। ये राडार कम से कम 50 किलोमीटर की दूरी तक हवाई लक्ष्यों का पता लगाने और ऊंचाई के हिसाब से व्यापक बीम कवरेज देने में सक्षम होंगे।
रक्षा मंत्रालय के दस्तावेज़ के अनुसार, 30 एलएलएलआर (इम्प्रूव्ड) और 2 एलएलएलआर (CRV) – क्लासरूम वेरिएंट – खरीदे जाएंगे। एलएलएलआर (इम्प्रूव्ड) राडार वास्तविक निगरानी कार्यों के लिए उपयोगी होंगे, जबकि CRV संस्करण प्रशिक्षण और परिचालन प्रशिक्षण उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल होगा।
रणनीतिक महत्व क्या?
ये राडार वायु रक्षा प्रणाली के एकीकरण और हवाई सुरक्षा में सुधार के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। ये कम राडार क्रॉस सेक्शन वाले लक्ष्य समेत विभिन्न प्रकार के हवाई खतरे पहचानने और ट्रैक करने में सक्षम होंगे। साथ ही, इन राडारों को मौजूदा वायु रक्षा नियंत्रण और रिपोर्टिंग सिस्टम के साथ जोड़ने का भी प्रावधान है।
खरीद प्रक्रिया और प्राथमिकता
सरकार ने RFP के जवाब केवल मूल उपकरण निर्माताओं (OEM) या उनके अधिकृत विक्रेताओं से आमंत्रित किए हैं। अगर एक उपकरण एक से अधिक पक्षों द्वारा पेश किया जाता है, तो OEM को प्राथमिकता दी जाएगी। इन राडारों का अंतिम उपयोगकर्ता भारतीय सेना होगी, जिससे इसकी निगरानी और सुरक्षा क्षमता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी। इस पहल के पूरा होने से भारतीय सेना की वायु सुरक्षा और सीमाओं की निगरानी क्षमता में महत्वपूर्ण सुधार आएगा और देश की रक्षा ढांचे को और मजबूत बनाया जाएगा।

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