रूस का बड़ा ऑफर और भारत की रणनीति
फरवरी 2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से रूस भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लायर बन गया है। रूस ने भारतीय रिफाइनरियों को तेल पर विशेष छूट देना शुरू किया है ताकि अमेरिकी दबाव और डील के बावजूद भारत रूसी तेल की खरीद जारी रखे। यूराल्स ग्रेड क्रूड अब ब्रेंट क्रूड की तुलना में प्रति बैरल करीब 10 डॉलर सस्ता उपलब्ध हो रहा है। जनवरी 2026 में यह छूट करीब 11 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच चुकी है, जो पहले की छूट से लगभग तीन गुना ज्यादा है।
रूस की यह रणनीति स्पष्ट करती है कि वह अपने बड़े ग्राहक भारत को नहीं खोना चाहता। डेटा के अनुसार, जनवरी 2026 में भारत ने रोजाना लगभग 12 लाख बैरल रूसी तेल खरीदा। विश्लेषकों का मानना है कि यह आयात आने वाले महीनों में 11 से 13 लाख बैरल प्रतिदिन के दायरे में स्थिर रह सकता है।
अमेरिकी दबाव और भारत की स्थिति
ट्रंप के दावों के बावजूद भारत ने रूस से तेल खरीद बंद नहीं की है। वित्तीय विश्लेषक नीरज शाह के अनुसार, मोदी सरकार 2026 के ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में रूसी राष्ट्रपति पुतिन से मुद्राओं में पेमेंट और तेल व्यापार पर बातचीत कर सकती है। भारत ने पहले ही अमेरिका की मांग ठुकरा दी है जिसमें भारत से रूसी तेल न खरीदने का आग्रह किया गया था। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भारत की प्राथमिकता 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करना है।
वेनेजुएला से तेल खरीद का कदम
हालांकि, भारत ने अमेरिकी और वैश्विक विकल्पों को भी अपनाया है। रिलायंस इंडस्ट्रीज ने वेनेजुएला से तेल खरीदना शुरू किया है। रॉयटर्स के अनुसार, कंपनी ने ट्रेडर विटोल से 20 लाख बैरल कच्चा तेल खरीदा है। यह दक्षिण अमेरिकी देश से तेल खरीदने का पहला मौका है। अमेरिका ने इस प्रक्रिया में वेनेजुएला के तेल पर नियंत्रण स्थापित किया है और देश की अंतरिम सरकार के साथ सप्लाई समझौता किया है।

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