बिहार सरकार ने खोला खजाना, महिलाओं के लिए खुशखबरी

पटना। बिहार सरकार ने अपने वार्षिक बजट के जरिए महिलाओं के सशक्तीकरण को केंद्र में रखकर एक मजबूत संदेश दिया है। राज्य के 3.46 लाख करोड़ रुपये के बजट में से 48 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि महिलाओं के बहुआयामी विकास और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए निर्धारित की गई है। यह कदम न केवल सामाजिक न्याय की दिशा में अहम है, बल्कि राज्य की आर्थिक प्रगति से महिलाओं को जोड़ने की स्पष्ट कोशिश भी दर्शाता है।

सात निश्चय-3 में महिलाओं की बड़ी हिस्सेदारी

सरकार की प्रमुख योजना सात निश्चय-3 के अंतर्गत करीब 14 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाने का अनुमान है। इसमें से लगभग 9 हजार करोड़ रुपये केवल महिलाओं से जुड़ी योजनाओं और कार्यक्रमों पर खर्च किए जाएंगे। इससे साफ है कि विकास योजनाओं में महिलाओं की भागीदारी को अब प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि निर्णायक बनाया जा रहा है।

जेंडर बजट को मिल रहा अंतिम रूप

बजट पेश होने के बाद राज्य सरकार अब जेंडर बजट की प्रक्रिया को अंतिम चरण में ले जा रही है। इसे मौजूदा बजट सत्र के अंतिम सप्ताह में बिहार विधानमंडल के दोनों सदनों में पेश किया जाएगा। जेंडर बजट के तहत विभिन्न विभागों की योजनाओं में महिलाओं पर होने वाले प्रत्यक्ष खर्च और सामान्य योजनाओं में महिलाओं की हिस्सेदारी को एकीकृत रूप में सामने रखा जाता है। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और यह स्पष्ट होगा कि महिलाओं के लिए वास्तव में कितना निवेश किया जा रहा है।

अधिक विभाग होंगे शामिल

आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 के जेंडर बजट में पहले से अधिक विभागों की रिपोर्टिंग की जाएगी। जहां चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 में 25 विभागों की रिपोर्ट शामिल थीं, वहीं अब 27 विभागों को इस प्रक्रिया में जोड़ा जाएगा। इससे महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर सरकारी निगरानी और जवाबदेही दोनों मजबूत होंगी।

आत्मनिर्भरता पर फोकस

सरकार ने वर्ष 2026-27 के लिए 9052 करोड़ 32 लाख रुपये केवल महिला सशक्तीकरण के लिए निर्धारित किए हैं। इस राशि का उपयोग महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने, रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा जैसी जरूरतों पर किया जाएगा। उद्देश्य साफ है महिलाओं को केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि विकास की भागीदार बनाना।

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