चीन की खतरनाक चाल, अमेरिका हैरान, भारत भी चिंतित?

नई दिल्ली। दुनिया की नजरों से दूर, लेकिन सैटेलाइट की पैनी आंखों में कैद एक नई रणनीति ने अमेरिका, भारत और अन्य वैश्विक ताकतों की चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट के मुताबिक चीन अफ्रीका के तटों के आसपास जिस तरह से बंदरगाहों का जाल बुन रहा है, वह केवल व्यापार तक सीमित नहीं दिखता। रक्षा विशेषज्ञ इसे भविष्य की समुद्री जंग की तैयारी के तौर पर देख रहे हैं।

पिछले एक दशक में चीन ने अफ्रीका के पूर्वी और पश्चिमी किनारों पर ऐसे बंदरगाह विकसित किए हैं, जो कागज़ों में तो व्यावसायिक हैं, लेकिन उनकी संरचना किसी सैन्य ठिकाने से कम नहीं। नाइजीरिया का लेक्की पोर्ट हो या केन्या का मोम्बासा, इन सभी को इस तरह डिजाइन किया गया है कि जरूरत पड़ने पर चीनी युद्धपोत यहां आसानी से ठहर सकें।

व्यापार के नाम पर सैन्य ठिकाने?

चीन की रणनीति सीधी नहीं, बल्कि बहुस्तरीय है। जिन बंदरगाहों को वह नागरिक उपयोग का बताता है, वहां गहराई, डॉकिंग क्षमता और ईंधन भंडारण जैसी सुविधाएं युद्धपोतों के अनुरूप रखी गई हैं। रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि ये बंदरगाह ‘ड्यूल यूज’ मॉडल पर तैयार किए गए हैं। शांति के समय व्यापार और संकट के समय सैन्य समर्थन के लिए।

खनिज संसाधनों पर भी बढ़ाया पकड़ 

इस समुद्री विस्तार के पीछे केवल सैन्य ताकत नहीं, बल्कि आर्थिक सुरक्षा की भी गहरी सोच है। अफ्रीका के कई देश कॉपर, कोबाल्ट और अन्य दुर्लभ खनिजों के बड़े स्रोत हैं, चीन ने इन खदानों को बंदरगाहों से जोड़ने के लिए रेलवे और हाईवे प्रोजेक्ट्स पर अरबों डॉलर खर्च किए हैं। भविष्य में अगर ताइवान जैसे मुद्दों पर चीन पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए जाते हैं, तब भी ये रास्ते उसकी अर्थव्यवस्था को चालू रख सकते हैं।

32 देशों में 78 बंदरगाह: ड्रैगन का फैलता जाल

अमेरिकी थिंक टैंकों के आंकड़ों के अनुसार, चीनी सरकारी कंपनियां अफ्रीका के 32 देशों में 78 बंदरगाहों से किसी न किसी रूप में जुड़ी हुई हैं, कहीं निर्माणकर्ता के रूप में, कहीं निवेशक और कहीं ऑपरेटर के तौर पर। इन बंदरगाहों के संचालन से चीन को न केवल आर्थिक लाभ मिलता है, बल्कि अन्य देशों के जहाजों और संवेदनशील कार्गो पर नजर रखने की क्षमता भी मिलती है।

अमेरिका और भारत के लिए क्यों बढ़ती चुनौती?

चीन की यह बढ़ती मौजूदगी वॉशिंगटन को चौकन्ना कर रही है। अमेरिका जहां अपनी नौसैनिक ताकत को और मजबूत करने की बात कर रहा है, वहीं चीन बड़ी नौसेना के साथ समुद्रों में सक्रिय हो रहा है। भारत के लिए यह स्थिति और भी संवेदनशील है। क्यों की ये भारत के व्यापारिक मार्गों और रणनीतिक हितों को सीधे प्रभावित कर सकती है। अगर ये बंदरगाह पूरी तरह सैन्य अड्डों में तब्दील हो जाते हैं, तो क्षेत्रीय संतुलन और समुद्री स्वतंत्रता पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।

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