रिकॉर्ड फंडिंग से मिलेगा रेलवे को नया रूप
बजट 2026 में उत्तर प्रदेश के लिए 20,012 करोड़ रुपये का रेलवे आवंटन किया गया है, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। इस राशि से राज्य में ट्रैक अपग्रेडेशन, स्टेशन आधुनिकीकरण, सिग्नलिंग सिस्टम और हाई-स्पीड रेल परियोजनाओं को गति दी जाएगी। पहले से ही यूपी में लगभग 92,000 करोड़ रुपये की रेलवे परियोजनाएं चल रही हैं, जिन्हें अब इस अतिरिक्त बजट से और तेज़ी मिलेगी।
यूपी को जोड़ेंगे दो बुलेट ट्रेन कॉरिडोर
देश में प्रस्तावित 7 नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर में से दो कॉरिडोर सीधे उत्तर प्रदेश से होकर गुजरेंगे, जो राज्य के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
1. दिल्ली–वाराणसी बुलेट ट्रेन कॉरिडोर: यह कॉरिडोर लगभग 865 किलोमीटर लंबा होगा। इसके शुरू होने के बाद दिल्ली से वाराणसी की दूरी मात्र 3 घंटे 50 मिनट में तय की जा सकेगी। यह हाई-स्पीड ट्रेन नोएडा, मथुरा, आगरा, कानपुर, लखनऊ और प्रयागराज जैसे प्रमुख शहरों से होकर गुजरेगी, जिससे राज्य के मध्य और पूर्वी हिस्से को सीधी और तेज़ कनेक्टिविटी मिलेगी।
2. वाराणसी–सिलीगुड़ी बुलेट ट्रेन कॉरिडोर: दूसरा कॉरिडोर वाराणसी को बिहार के पटना के रास्ते पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी से जोड़ेगा। इस रूट पर बुलेट ट्रेन चलने के बाद वाराणसी से सिलीगुड़ी की यात्रा महज 2 घंटे 55 मिनट में पूरी हो सकेगी। यह परियोजना पूर्वी भारत को हाई-स्पीड रेल नेटवर्क से जोड़ने में अहम भूमिका निभाएगी।
यूपी बनेगा इकोनॉमिक कॉरिडोर का केंद्र
इन बुलेट ट्रेन परियोजनाओं के साथ उत्तर प्रदेश केवल ट्रांजिट राज्य नहीं रहेगा, बल्कि एक इकोनॉमिक हब के रूप में उभरेगा। हाई-स्पीड कॉरिडोर के किनारे नए औद्योगिक क्षेत्र, लॉजिस्टिक्स हब और रोजगार केंद्र विकसित किए जाएंगे। इससे निवेश बढ़ेगा और स्थानीय युवाओं के लिए नए अवसर पैदा होंगे।
पर्यटन और तीर्थ यात्रा को मिलेगा बड़ा बढ़ावा
इस बुलेट ट्रेन से वाराणसी, अयोध्या, मथुरा और प्रयागराज जैसे धार्मिक शहरों तक पहुंच बेहद आसान हो जाएगी। श्रद्धालु और पर्यटक कम समय में यात्रा कर सकेंगे, जिससे होटल, परिवहन और स्थानीय कारोबार को सीधा लाभ मिलेगा। दिल्ली–वाराणसी का सफर, जो अभी 8 से 10 घंटे तक का होता है, वह आधे से भी कम समय में पूरा हो सकेगा।

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