F-35 और Su-57 नहीं, भारत को राफेल पसंद, फ्रांस खुश!

नई दिल्ली: भारतीय वायुसेना के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। अमेरिका के F-35 और रूस के Su-57 जैसे प्रस्तावों के बावजूद, भारत ने राफेल लड़ाकू विमानों पर भरोसा जताया है। अगले सप्ताह रक्षा मंत्रालय में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में 114 नए राफेल विमानों की खरीद पर चर्चा की जाएगी।

यह डील वायुसेना की घटती स्क्वाड्रन संख्या को बढ़ाने और देश की हवाई ताकत को मजबूत करने के लिए बेहद अहम है। वर्तमान में वायुसेना केवल 30 स्क्वाड्रन के साथ काम कर रही है, जबकि इसकी स्वीकृत क्षमता 42 स्क्वाड्रन होनी चाहिए। इस डील के पूरा होने के बाद भारतीय वायुसेना का राफेल बेड़ा 150 विमानों तक पहुँच जाएगा।

मेक इन इंडिया

डील की सबसे बड़ी खासियत यह है कि लगभग 80 प्रतिशत विमान भारत में बनाए जाएंगे। फ्रांस की डसॉल्ट एविएशन कंपनी भारतीय उद्योगपतियों के साथ मिलकर इन विमानों का निर्माण करेगी। शुरुआत में कुछ विमान सीधे फ्रांस से भारत आएंगे, जबकि अधिकांश विमान भारत में तैयार होंगे। इस प्रक्रिया में स्वदेशी सामग्री का उपयोग बढ़ाकर भारत को फाइटर जेट उत्पादन का केंद्र बनाया जाएगा।

राफेल की ताकत

राफेल केवल एक लड़ाकू विमान नहीं, बल्कि यह उन्नत मल्टी-रोल कमांड सेंटर है। इसमें हवा से हवा में मार करने वाली Meteor मिसाइल और जमीन पर सटीक हमले की क्षमता रखने वाली SCALP मिसाइलें लगी हैं। इसके साथ ही भारत चाहता है कि इन विमानों में भारतीय मिसाइल और हथियार प्रणाली भी जोड़ी जाए।

रणनीतिक महत्व

यह डील चीन और पाकिस्तान के बढ़ते सैन्य गठजोड़ के समय में भारतीय सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। राफेल विमानों की लॉन्ग-रेंज मिसाइल और उन्नत रडार तकनीक वायुसेना की मारक क्षमता को कई गुना बढ़ा देगी।

मैक्रों की भारत यात्रा में अंतिम मुहर

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों 18 फरवरी 2026 को AI Summit में भाग लेने भारत आएंगे। इसी दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मैक्रों के बीच द्विपक्षीय बैठक में राफेल डील पर अंतिम निर्णय हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह डील न केवल वायुसेना की ताकत बढ़ाएगी, बल्कि भारत को मेक इन इंडिया के तहत आधुनिक विमान निर्माण का प्रमुख केंद्र बनाने में भी मदद करेगी।

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