रूस का साफ रुख: भारत के साथ साझेदारी फायदेमंद
रूसी विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर कहा कि भारत द्वारा रूसी हाइड्रोकार्बन की खरीद दोनों देशों के लिए लाभकारी है और यह वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाती है। मंत्रालय ने यह भी दोहराया कि भारत के साथ ऊर्जा सहयोग को और मजबूत करने के लिए मॉस्को पूरी तरह तैयार है।
इससे पहले क्रेमलिन भी यह स्पष्ट कर चुका है कि भारत ने रूस से तेल आयात रोकने को लेकर कोई औपचारिक जानकारी नहीं दी है। रूस के मुताबिक, भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए फैसले करता है और इसमें कोई असामान्यता नहीं है।
अमेरिकी दबाव के बीच आया बयान
रूस का यह रुख ऐसे वक्त सामने आया है, जब अमेरिका लंबे समय से भारत पर रूस से तेल खरीद कम करने का दबाव बना रहा है। अमेरिका की रणनीति यूक्रेन युद्ध के चलते रूस की आर्थिक ताकत को कमजोर करने की रही है। इसी क्रम में पहले भारत पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाया गया था, जिसे बाद में भारत-अमेरिका ट्रेड डील के ऐलान के साथ हटा लिया गया।
हालांकि भारत पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि उसकी ऊर्जा नीति राष्ट्रीय हित और ऊर्जा सुरक्षा पर आधारित है, न कि किसी एक देश के दबाव पर।

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