न्यूक्लियर ट्रायड को मिला मजबूत आधार
भारत की पहली स्वदेशी परमाणु बैलिस्टिक मिसाइल सबमरीन आईएनएस अरिहंत और आईएनएस अरिघात रही हैं। इन सबमरीन के शामिल होने से भारत की न्यूक्लियर ट्रायड क्षमता मजबूत हुई है, जिसका मतलब है कि देश जमीन, हवा और समुद्र तीनों माध्यमों से परमाणु हमला करने में सक्षम है। हालांकि इन परियोजनाओं को विकसित करना तकनीकी रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण रहा और इसमें लंबा समय लगा।
S4 क्लास में किए गए तकनीकी सुधार
पहली पीढ़ी की सबमरीन के बाद अगली पीढ़ी के रूप में S4 क्लास सबमरीन तैयार की गई, जिसमें कई महत्वपूर्ण तकनीकी सुधार किए गए। आईएनएस अरिधमन इसी श्रेणी की सबमरीन है, जिसका वजन लगभग 7000 टन के आसपास बताया जाता है। इस परियोजना को निर्माण से लेकर सेवा में शामिल होने तक करीब 15 साल का समय लगा, जिसमें केवल निर्माण कार्य में ही लगभग 11–12 साल लग गए।
S-5 क्लास होगी अब तक की सबसे बड़ी सबमरीन
नई S-5 क्लास सबमरीन भारत की अब तक की सबसे बड़ी और शक्तिशाली परमाणु सबमरीन मानी जा रही है। इसका अनुमानित वजन लगभग 13,000 टन होगा, जो S4 क्लास से लगभग दोगुना है। बड़े आकार की वजह से इसमें अधिक मिसाइल ले जाने की क्षमता होगी और यह समुद्र में लंबे समय तक तैनात रह सकेगी।
इसके अलावा इस नई सबमरीन में अत्याधुनिक रडार, सेंसर और निगरानी प्रणाली भी लगाई जाएंगी, जिससे दुश्मनों की गतिविधियों पर नजर रखना और भी आसान हो जाएगा। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार यह भारत की समुद्री रणनीतिक क्षमता को नई ऊंचाई दे सकती है।

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