कैसे मिलेगी नई सुविधा?
नई व्यवस्था के तहत अगर किसी भूधारक को जमीन से जुड़ा कोई पुराना या ऑफलाइन रिकॉर्ड चाहिए, तो उसे इसके लिए ऑनलाइन आवेदन करना होगा। आवेदन मिलने के बाद संबंधित अंचलाधिकारी (CO) रिकॉर्ड से दस्तावेज निकालकर उसे स्कैन करेंगे और फिर डिजिटल रूप में आवेदक को उपलब्ध कराएंगे। इस प्रक्रिया के बाद लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
सरकार का बड़ा निर्देश
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव जय सिंह ने इस संबंध में सभी जिलाधिकारियों, अपर समाहर्ताओं, डीसीएलआर और अंचलाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। आदेश में कहा गया है कि इस व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए ताकि आम लोगों को जल्द राहत मिल सके।
पहले से चल रही ऑनलाइन व्यवस्था
विभाग ने बताया कि 1 जनवरी से जमीन से जुड़े अधिकतर अभिलेख पहले ही ऑनलाइन उपलब्ध कराए जा रहे हैं और ऑफलाइन प्रक्रिया को काफी हद तक समाप्त किया जा चुका है। अब डिजिटल सिग्नेचर वाली दस्तावेज प्रतियां पूरी तरह मान्य हैं।
जिन दस्तावेजों में थी समस्या, अब होगा समाधान
कुछ पुराने या विशेष प्रकार के रिकॉर्ड अभी तक ऑनलाइन पोर्टल पर उपलब्ध नहीं थे, जिससे लोगों को परेशानी होती थी। नई व्यवस्था के तहत ऐसे सभी दस्तावेजों को स्कैन कर ऑनलाइन उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे रिकॉर्ड हासिल करना आसान हो जाएगा।
बिहार में इस नई सुविधा से रैयतों को क्या फायदा होगा?
इस नई सुविधा से जमीन मालिकों को कई फायदे मिलेंगे। जैसे दफ्तरों के चक्कर खत्म होंगे, समय और पैसे की बचत होगी, पुराने रिकॉर्ड भी आसानी से मिलेंगे, पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और डिजिटल होगी।

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