श्रम और रोजगार मंत्रालय के मुताबिक, सरकार गिग वर्कर्स के लिए एक्सीडेंटल इंश्योरेंस, हेल्थ सुविधाएं, मैटरनिटी सपोर्ट, बुजुर्गों के लिए सुरक्षा, एजुकेशन लोन और अंतिम संस्कार सहायता जैसी कई योजनाओं पर काम कर रही है। इसके लिए एक अलग सोशल सिक्योरिटी फंड तैयार किया जा रहा है, जिससे जरूरत पड़ने पर कामगारों को आर्थिक मदद मिल सकेगी।
नेशनल सोशल सिक्योरिटी बोर्ड को मिली मंजूरी
सरकार ने गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए नेशनल सोशल सिक्योरिटी बोर्ड के गठन की दिशा में भी कदम बढ़ा दिए हैं। यह बोर्ड इन कामगारों के हितों से जुड़ी योजनाओं की निगरानी करेगा और नई कल्याणकारी नीतियों को लागू करने में अहम भूमिका निभाएगा। माना जा रहा है कि इससे असंगठित क्षेत्र में काम कर रहे लाखों लोगों को पहली बार संगठित सुरक्षा कवच मिल सकता है।
ई-श्रम पोर्टल से जोड़ा जाएगा डेटा
सरकार की योजना है कि एग्रीगेटर कंपनियों और ई-श्रम पोर्टल के बीच सीधा डेटा लिंक बनाया जाए। इसके जरिए गिग वर्कर्स की जानकारी रियल-टाइम में अपडेट होगी और योजनाओं का लाभ सीधे पात्र लोगों तक पहुंच सकेगा। कंपनियों को अपने कर्मचारियों का डेटा ई-श्रम पोर्टल से जोड़ने के निर्देश भी दिए गए हैं। मोबाइल ऐप के जरिए कामगार अपनी सुविधाओं, बीमा और सहायता से जुड़ी जानकारी आसानी से देख सकेंगे। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी।
लाखों कामगारों को मिलेगी राहत
यदि यह योजना प्रभावी तरीके से लागू होती है तो इससे देश की तेजी से बढ़ती डिजिटल और गिग इकॉनमी को मजबूती मिलेगी। अभी तक इस क्षेत्र में काम करने वाले अधिकतर लोगों के पास बीमा, पेंशन या स्वास्थ्य सुरक्षा जैसी सुविधाएं नहीं थीं। नई योजना से उन्हें आर्थिक स्थिरता और भविष्य की सुरक्षा मिल सकती है।

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