सरकारी जमीन की फर्जी रजिस्ट्री पर सख्ती
पिछले कुछ वर्षों में बिहार के कई जिलों से सरकारी जमीन, खास महल और विवादित भूखंडों की फर्जी खरीद-बिक्री के मामले सामने आए थे। कई जगहों पर भू-माफियाओं ने दस्तावेजों में हेराफेरी कर सरकारी जमीन को निजी बताकर उसका निबंधन करा लिया। इससे न सिर्फ सरकार को राजस्व का नुकसान हुआ, बल्कि जमीन विवाद भी तेजी से बढ़े। अब सरकार ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए नई डिजिटल व्यवस्था तैयार कर रही है।
निबंधन से पहले होगा ऑनलाइन सत्यापन
नई व्यवस्था के तहत किसी भी जमीन की रजिस्ट्री से पहले उसके रिकॉर्ड का ऑनलाइन सत्यापन किया जाएगा। जमीन सरकारी है, खास महल की श्रेणी में है या विवादित है, इसकी जानकारी डिजिटल रिकॉर्ड से सीधे जोड़ी जाएगी। रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रक्रिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक का भी उपयोग किया जाएगा। अगर सिस्टम में जमीन सरकारी या विवादित पाई जाती है, तो उसका निबंधन स्वतः रुक जाएगा।
एसओपी में होंगे बड़े बदलाव
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग इसको लेकर उत्पाद एवं निबंधन विभाग की मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) की समीक्षा कर रहा है। समीक्षा पूरी होने के बाद सभी जिलों को नए दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। सरकार चाहती है कि जमीन रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और तकनीकी रूप से सुरक्षित बने, ताकि फर्जीवाड़े की कोई गुंजाइश न रहे।
अधिकारियों की तय होगी जिम्मेदारी
नई व्यवस्था में सिर्फ तकनीक ही नहीं, बल्कि अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जाएगी। यदि किसी सरकारी जमीन का गलत तरीके से निबंधन होता है, तो संबंधित पदाधिकारियों पर कार्रवाई की जा सकती है। विभाग का कहना है कि भविष्य में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
जल्द जारी हो सकते हैं नए निर्देश
विभागीय स्तर पर तैयारी लगभग अंतिम चरण में है। माना जा रहा है कि जल्द ही नई व्यवस्था को लेकर औपचारिक आदेश जारी किए जा सकते हैं। इसके बाद बिहार में सरकारी जमीन की अवैध खरीद-बिक्री और फर्जी रजिस्ट्री पर बड़ी रोक लगने की उम्मीद है।

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