डिजिटल नक्शे से होगा पूरा रिकॉर्ड तैयार
इस सर्वे के दौरान हर प्लॉट का डिजिटल नक्शा तैयार किया जाएगा। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किस जमीन का वास्तविक मालिक कौन है और उसका क्षेत्रफल, सीमा और उपयोग क्या है। सरकार का उद्देश्य है कि जमीन से जुड़े सभी रिकॉर्ड एकीकृत डिजिटल सिस्टम में दर्ज किए जाएं।
जमीन मालिकों को रखने होंगे ये जरूरी दस्तावेज
सर्वे प्रक्रिया को सुचारू रूप से पूरा करने और अपने मालिकाना हक को सुरक्षित रखने के लिए नागरिकों को कुछ महत्वपूर्ण कागजात तैयार रखने होंगे।
1. स्व-घोषणा पत्र (प्रपत्र-2): इसमें जमीन का पूरा विवरण देना होगा, जैसे रकबा (क्षेत्रफल), खेसरा नंबर और चारों दिशाओं की सीमा (चौहद्दी) आदि।
2. वंशावली (प्रपत्र-3i): यदि जमीन पैतृक संपत्ति है, तो परिवार के उत्तराधिकार को साबित करने के लिए वंशावली दस्तावेज जरूरी होगा।
3. जमीन से जुड़े कानूनी दस्तावेज: खरीदी गई जमीन के लिए रजिस्ट्री की कॉपी, वसीयत या दान पत्र जैसे प्रमाण प्रस्तुत करने होंगे।
4. खतियान की प्रति: यदि उपलब्ध हो तो पुराने भूमि रिकॉर्ड या खतियान की कॉपी भी उपयोगी होगी।
5. लगान रसीद: भूमि कर (मालगुजारी) की अद्यतन रसीद की फोटोकॉपी अनिवार्य होगी।
6. पहचान पत्र: आधार कार्ड और वोटर आईडी जैसे वैध पहचान पत्र साथ रखना जरूरी होगा।
7. अन्य आवश्यक दस्तावेज: यदि जमीन उत्तराधिकार में मिली है और किसी कानूनी प्रक्रिया से जुड़ी है, तो मृत्यु प्रमाण पत्र या कोर्ट आदेश की प्रमाणित कॉपी भी मांगी जा सकती है।
ऑनलाइन प्रक्रिया से होगी सुविधा आसान
सरकार ने इस पूरी प्रक्रिया को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ दिया है। नागरिक अपने भूमि रिकॉर्ड, आवेदन फॉर्म और सर्वे से जुड़ी जानकारी के लिए बिहार भूमि पोर्टल का उपयोग कर सकते हैं। पुराने रिकॉर्ड या दस्तावेज निकालने के लिए भू-अभिलेख पोर्टल की सुविधा भी उपलब्ध है।
पारदर्शिता और विवादों में कमी का लक्ष्य
इस पूरे अभियान का मुख्य उद्देश्य जमीन से जुड़े विवादों को कम करना और भूमि रिकॉर्ड को पारदर्शी बनाना है। डिजिटल रिकॉर्ड बनने के बाद भविष्य में किसी भी तरह की गलतफहमी या विवाद की संभावना काफी हद तक कम हो जाएगी।

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