वैश्विक अर्थव्यवस्था में मंदी का संकेत
सर्वे में शामिल करीब 90 प्रतिशत मुख्य अर्थशास्त्रियों का मानना है कि अगले एक वर्ष में वैश्विक आर्थिक विकास धीमा रह सकता है। हालांकि, केवल एक छोटे हिस्से ने वैश्विक मंदी की आशंका जताई है। इससे यह स्पष्ट होता है कि दुनिया की अर्थव्यवस्था दबाव में तो रहेगी, लेकिन गंभीर मंदी की संभावना सीमित मानी जा रही है।
भारत की स्थिति अन्य देशों से बेहतर
रिपोर्ट में भारत को उन देशों में शामिल किया गया है, जहां विकास की संभावनाएं अपेक्षाकृत मजबूत बनी हुई हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, देश की घरेलू मांग, निवेश में वृद्धि और आर्थिक गतिविधियों की मजबूती भारत को वैश्विक स्तर पर अलग स्थिति में रख रही है।
ऊर्जा और सप्लाई चेन को लेकर चिंता
सर्वे में यह भी चेतावनी दी गई है कि यदि अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों में बाधा आती है, तो इसका असर वैश्विक महंगाई पर पड़ सकता है। ऊर्जा और खाद्य पदार्थों की कीमतों में वृद्धि के साथ सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई गई है।
भारत और अमेरिका पर अपेक्षाकृत कम असर की उम्मीद
रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक संकट का सबसे अधिक प्रभाव पश्चिम एशिया और उत्तरी अफ्रीका जैसे क्षेत्रों पर पड़ सकता है। इसके विपरीत भारत और अमेरिका जैसे बड़े बाजार अपनी मजबूत घरेलू मांग और निवेश के कारण अपेक्षाकृत स्थिर बने रह सकते हैं।

0 comments:
Post a Comment