मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, तालिबान सरकार के कार्यवाहक रक्षा मंत्री मुल्ला मोहम्मद याकूब मुजाहिद की मॉस्को यात्रा के दौरान दोनों पक्षों के बीच रक्षा सहयोग को लेकर महत्वपूर्ण बातचीत हुई। माना जा रहा है कि इस समझौते में केवल एयर डिफेंस सिस्टम ही नहीं, बल्कि जमीनी हथियार और सैन्य प्रशिक्षण जैसे पहलू भी शामिल हो सकते हैं।
पाकिस्तान की बढ़ सकती है चिंता
जानकारों का मानना है कि यदि अफगानिस्तान को आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम मिलते हैं, तो पाकिस्तान के लिए सीमा पार सैन्य कार्रवाई करना पहले की तुलना में अधिक कठिन हो सकता है। पिछले कुछ वर्षों में पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा सुरक्षा और आतंकवाद को लेकर तनाव कई बार सामने आया है। ऐसे में तालिबान सरकार की सैन्य ताकत बढ़ने से क्षेत्रीय शक्ति संतुलन पर असर पड़ सकता है। यही कारण है कि इस संभावित समझौते को पाकिस्तान के लिए रणनीतिक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।
रूस-तालिबान संबंध हो रहे मजबूत
2021 में अफगानिस्तान में तालिबान की वापसी के बाद रूस उन देशों में शामिल रहा जिसने काबुल से अपने संबंध पूरी तरह खत्म नहीं किए। हालांकि रूस ने अब तक तालिबान सरकार को औपचारिक मान्यता नहीं दी है, लेकिन दोनों देशों के बीच आर्थिक और सुरक्षा सहयोग लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है। रूस पहले भी अफगानिस्तान के साथ तेल, गैस और गेहूं की आपूर्ति को लेकर समझौते कर चुका है। अब रक्षा क्षेत्र में बढ़ती साझेदारी यह संकेत देती है कि मॉस्को अफगानिस्तान में अपनी रणनीतिक मौजूदगी मजबूत करना चाहता है।
क्या बदल सकता है क्षेत्रीय समीकरण?
अगर यह रक्षा समझौता पूरी तरह लागू होता है, तो दक्षिण एशिया और मध्य एशिया की सुरक्षा राजनीति पर इसका असर देखने को मिल सकता है। अफगानिस्तान लंबे समय से अस्थिरता और संघर्ष का केंद्र रहा है, लेकिन अब वहां की नई सत्ता अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों के जरिए अपनी सैन्य और राजनीतिक स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
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