किसानों की चिंताओं के बाद केंद्र सरकार का बड़ा फैसला

नई दिल्ली। देश के गन्ना किसानों और चीनी उद्योग से जुड़े संगठनों की ओर से उठाई गई चिंताओं के बाद केंद्र सरकार ने गन्ना (नियंत्रण) आदेश 2026 के मसौदे को वापस लेने का निर्णय लिया है। सरकार का यह कदम किसानों की आशंकाओं और विभिन्न हितधारकों से प्राप्त सुझावों को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है। माना जा रहा है कि इस फैसले से गन्ना उत्पादक राज्यों के लाखों किसानों को फिलहाल राहत मिलेगी।

क्यों वापस लिया गया मसौदा?

केंद्र सरकार ने अप्रैल 2026 में गन्ना नियंत्रण से जुड़े नियमों में बदलाव के लिए एक नया मसौदा जारी किया था। इस मसौदे पर राज्य सरकारों, किसान संगठनों, चीनी मिलों और अन्य संबंधित पक्षों से सुझाव और आपत्तियां मांगी गई थीं। समीक्षा के दौरान सरकार को कई महत्वपूर्ण सुझाव प्राप्त हुए, जिनमें किसानों और उद्योग जगत ने कुछ प्रावधानों पर गंभीर चिंता व्यक्त की थी। इन्हीं प्रतिक्रियाओं को देखते हुए खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने मसौदे को फिलहाल वापस लेने और दोबारा विस्तृत समीक्षा करने का फैसला किया है।

किसानों की क्या थी चिंता?

गन्ना किसानों के बीच सबसे बड़ी चिंता उनके गन्ने के मूल्य और भुगतान व्यवस्था को लेकर थी। किसान संगठनों को आशंका थी कि प्रस्तावित बदलावों का असर भविष्य में किसानों के आर्थिक हितों पर पड़ सकता है। खासतौर पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश सहित अन्य प्रमुख गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में इस मसौदे को लेकर चर्चा तेज हो गई थी। किसानों का मानना था कि किसी भी नए नियम को लागू करने से पहले उनके हितों और मौजूदा व्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभाव का गहन अध्ययन होना चाहिए।

गुड़ और खांडसारी उद्योग ने भी जताई आपत्ति

केवल किसान ही नहीं, बल्कि गुड़ और खांडसारी उद्योग से जुड़े लोगों ने भी मसौदे के कुछ प्रावधानों पर सवाल उठाए थे। उद्योग जगत का कहना था कि नए नियमों से उनकी कार्यप्रणाली और लागत पर असर पड़ सकता है। ऐसे में सरकार पर व्यापक विचार-विमर्श की मांग बढ़ने लगी थी।

अब आगे क्या होगा?

सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्राप्त सुझावों और आपत्तियों का विस्तार से अध्ययन किया जाएगा। इसके बाद जरूरत पड़ने पर एक संशोधित और अधिक संतुलित मसौदा तैयार किया जा सकता है। समीक्षा प्रक्रिया पूरी होने तक वर्तमान में लागू गन्ना नियंत्रण आदेश 1966 ही प्रभावी रहेगा।

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