प्रमंडलीय आयुक्तों को सौंपी गई जिम्मेदारी
शिक्षा विभाग के आदेश के अनुसार सभी प्रमंडलीय आयुक्तों को अभियान चलाकर स्कूलों की जांच पूरी कराने के निर्देश दिए गए हैं। यह जांच जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग की संयुक्त टीमों के माध्यम से की जाएगी। इस अभियान को व्यापक और समयबद्ध तरीके से पूरा करने पर जोर दिया गया है ताकि किसी भी स्तर पर अनियमितता न रह जाए।
उच्च स्तरीय टीम करेगी जांच
जिला स्तर पर बनने वाली जांच टीम में कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। इनमें जिलाधिकारी, उप विकास आयुक्त, अनुमंडल पदाधिकारी, जिला शिक्षा पदाधिकारी और प्रखंड विकास पदाधिकारी शामिल रहेंगे। इससे जांच प्रक्रिया को मजबूत और निष्पक्ष बनाने की कोशिश की जा रही है।
फीस, सुविधा और शिक्षकों की जांच
जांच के दौरान स्कूलों की कई महत्वपूर्ण बातों की पड़ताल की जाएगी, जैसे स्कूल की आधारभूत संरचना, शिक्षकों और कर्मचारियों की संख्या, शिक्षकों का वेतन, छात्रों से ली जा रही फीस, स्कूल में दी जा रही सुविधाएं। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ न पड़े।
मान्यता और नवीनीकरण की भी होगी जांच
सरकार यह भी जांच करेगी कि निजी स्कूलों ने अपनी प्रस्वीकृति (मान्यता) का समय पर नवीनीकरण कराया है या नहीं। नियमों के अनुसार निजी स्कूलों को निर्धारित अवधि के बाद मानकों के आधार पर नवीनीकरण कराना आवश्यक होता है।
शिक्षा का अधिकार कानून के तहत कार्रवाई
सभी निजी स्कूलों की जांच शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम और बिहार राज्य की मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा नियमावली 2011 के तहत की जाएगी। इसके तहत यह देखा जाएगा कि स्कूल तय मानकों और नियमों का पालन कर रहे हैं या नहीं।
नियम तोड़ने वाले स्कूलों पर होगी सख्त कार्रवाई
यदि किसी स्कूल में नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर स्कूल की प्रस्वीकृति भी रद्द की जा सकती है। इससे शिक्षा व्यवस्था में अनुशासन और जवाबदेही सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है।

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