पंचायती राज विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार, ग्राम पंचायतों में नई निर्वाचित पंचायतों के गठन और उनकी पहली बैठक होने तक निवर्तमान प्रधान प्रशासक के रूप में कार्य करेंगे। हालांकि, उनके अधिकार सीमित रहेंगे और उन्हें निर्धारित नियमों के तहत ही कार्य करना होगा।
1 .नए कार्यों के लिए लेनी होगी मंजूरी
सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रशासक किसी भी नए विकास कार्य या नई योजना को अपने स्तर पर शुरू नहीं कर सकेंगे। यदि किसी नए कार्य की आवश्यकता होगी तो संबंधित प्रस्ताव जिला पंचायत राज अधिकारी के माध्यम से जिलाधिकारी को भेजा जाएगा और उनकी स्वीकृति मिलने के बाद ही कार्य शुरू किया जा सकेगा। केंद्र या राज्य सरकार की नई योजनाओं तथा विभिन्न आयोगों की संस्तुतियों से जुड़े मामलों में भी जिलाधिकारी की मंजूरी अनिवार्य होगी।
2 .केवल नियमित कार्यों की होगी अनुमति
प्रशासकों को केवल नियमित और आवश्यक प्रशासनिक कार्य करने की अनुमति दी गई है। पहले से स्वीकृत विकास कार्य, निर्माणाधीन परियोजनाएं, मरम्मत कार्य और पूर्ण हो चुके कार्यों का मूल्यांकन कर उनका भुगतान कराया जा सकेगा। इसके अलावा किसी भी प्रकार के नीतिगत फैसले लेने की अनुमति प्रशासकों को नहीं होगी।
3 .जहां प्रधान नहीं, वहां एडीओ बनेंगे प्रशासक
जिन ग्राम पंचायतों में पहले से प्रधान का पद रिक्त है या जहां प्रशासनिक समिति कार्यरत है, वहां सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) को प्रशासक नियुक्त किया जाएगा। ऐसे अधिकारी पंचायत के नियमित कार्यों का संचालन करेंगे।
4 .अगले छह माह तक लागू रहेगी ये पूरी व्यवस्था
सरकार के आदेश के अनुसार यह व्यवस्था नई ग्राम पंचायतों की पहली बैठक होने तक या अधिकतम छह महीने की अवधि तक प्रभावी रहेगी। जो भी स्थिति पहले आएगी, उसी के आधार पर प्रशासक का कार्यकाल समाप्त माना जाएगा।

0 comments:
Post a Comment