राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने इस व्यवस्था को लागू करने के लिए सभी जिलों के अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए हैं। नई व्यवस्था का उद्देश्य भूमि संबंधी सेवाओं को अधिक पारदर्शी, सरल और नागरिकों के लिए सुविधाजनक बनाना है।
ऑनलाइन आवेदन से मिलेगी दस्तावेजों की प्रति
नई व्यवस्था के तहत यदि किसी भूधारी को ऐसा भूमि अभिलेख चाहिए जो विभाग के पोर्टल पर उपलब्ध नहीं है, तो वह ऑनलाइन आवेदन कर सकेगा। आवेदन प्राप्त होने के बाद संबंधित अंचल कार्यालय रिकॉर्ड रूम से आवश्यक दस्तावेज निकालेगा। इसके बाद अभिलेख को स्कैन कर डिजिटल रूप में तैयार किया जाएगा और आवेदक को ऑनलाइन उपलब्ध कराया जाएगा।
पहले से ऑनलाइन हैं कई भूमि अभिलेख
राज्य सरकार पहले ही भूमि से जुड़े कई महत्वपूर्ण अभिलेखों को डिजिटल माध्यम से उपलब्ध करा चुकी है। वर्ष 2026 की शुरुआत से भूमि अभिलेखों के लिए ऑफलाइन व्यवस्था को समाप्त करते हुए अधिकतर सेवाओं को ऑनलाइन कर दिया गया है। साथ ही, डिजिटल हस्ताक्षरित प्रतियों को भी वैध माना गया है, जिससे दस्तावेजों की प्रमाणिकता को लेकर किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी।
पारदर्शिता और सुविधा को मिलेगा बढ़ावा
इस फैसले से भूमि प्रबंधन व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार की संभावनाओं में कमी आएगी। ऑनलाइन प्रक्रिया लागू होने से रिकॉर्ड सुरक्षित रहेंगे और जरूरत पड़ने पर लोग आसानी से अपनी जमीन से संबंधित दस्तावेज हासिल कर सकेंगे।
रैयतों को होगा सीधा लाभ
नई व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों और रैयतों को मिलेगा। उन्हें अब छोटे-छोटे कामों के लिए कार्यालयों के कई चक्कर लगाने की जरूरत नहीं होगी। ऑनलाइन आवेदन के माध्यम से घर बैठे दस्तावेज प्राप्त किए जा सकेंगे, जिससे समय और खर्च दोनों की बचत होगी। सरकार की यह पहल बिहार में भूमि सेवाओं के डिजिटलीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इससे आम लोगों को बेहतर और तेज सेवाएं मिलने की उम्मीद है।

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