सरकारी परियोजनाओं के लिए सीधे खरीदी जाएगी जमीन
नई नीति के अनुसार, यदि किसी सरकारी या लोकहित की परियोजना के लिए जमीन की आवश्यकता होगी और सरकारी भूमि उपलब्ध नहीं होगी, तो ऐसी स्थिति में रैयतों से आपसी सहमति के आधार पर सीधे भूमि खरीदी जाएगी। इससे भूमि अधिग्रहण की पुरानी जटिल प्रक्रियाओं में काफी कमी आने की उम्मीद है।
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में अलग-अलग मुआवजा
सरकार ने मुआवजे की व्यवस्था को क्षेत्र के आधार पर तय किया है। शहरी क्षेत्रों में जमीन का मूल्य या सर्किल रेट, जो भी अधिक होगा, उसके दो गुना तक भुगतान किया जाएगा। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में यह मुआवजा चार गुना तक दिया जाएगा। यह कदम किसानों और भूमि मालिकों के हित में एक बड़ा सुधार माना जा रहा है।
स्टांप और पंजीयन शुल्क से मिलेगी छूट
इस नई नीति की एक बड़ी विशेषता यह है कि इसके तहत खरीदी जाने वाली जमीन पर किसी भी प्रकार का स्टांप शुल्क या पंजीयन शुल्क नहीं लिया जाएगा। इससे जमीन बेचने वाले रैयतों को अतिरिक्त आर्थिक लाभ मिलेगा और प्रक्रिया भी सरल हो जाएगी।
विकास कार्यों को मिलेगी रफ्तार
सरकार का मानना है कि इस नीति के लागू होने से सड़क, पुल, अस्पताल, स्कूल और अन्य सार्वजनिक परियोजनाओं के निर्माण में तेजी आएगी। भूमि अधिग्रहण में आने वाली देरी अब काफी हद तक कम हो जाएगी, जिससे विकास कार्य समय पर पूरे किए जा सकेंगे।
रैयतों के लिए पारदर्शी व्यवस्था
यह नई व्यवस्था न केवल प्रशासनिक प्रक्रिया को आसान बनाएगी, बल्कि रैयतों को उचित और पारदर्शी मुआवजा भी सुनिश्चित करेगी। इससे सरकार और जमीन मालिकों के बीच विश्वास बढ़ेगा और विवादों की संभावना कम होगी।

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