भारत से अब ये देश खरीदेगा मिसाइल, चीन की बढ़ी टेंशन!

नई दिल्ली। भारत ने रक्षा क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए वियतनाम के साथ ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल के निर्यात समझौते को अंतिम रूप दे दिया है। इस सौदे को भारत की रक्षा कूटनीति और स्वदेशी रक्षा उद्योग के लिए बड़ी सफलता माना जा रहा है। खास बात यह है कि दक्षिण चीन सागर क्षेत्र में बढ़ते रणनीतिक तनाव के बीच यह समझौता क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों को भी प्रभावित कर सकता है।

वियतनाम बना ब्रह्मोस खरीदने वाला दूसरा देश

फिलीपींस के बाद अब वियतनाम भारत की ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने वाला दूसरा विदेशी ग्राहक बन गया है। लंबे समय से दोनों देशों के बीच इस सौदे को लेकर बातचीत चल रही थी, जिसे अब अंतिम रूप मिल गया है। इससे भारत की रक्षा निर्यात क्षमता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलने की उम्मीद है।

क्या मिलेगा वियतनाम को?

रिपोर्टों के अनुसार इस रक्षा पैकेज में तटीय सुरक्षा के लिए मोबाइल मिसाइल बैटरियां, ब्रह्मोस मिसाइलों की शुरुआती खेप, तकनीकी सहायता, लॉजिस्टिक सपोर्ट और वियतनामी सैन्य कर्मियों का प्रशिक्षण शामिल है। भविष्य में जरूरत पड़ने पर इस समझौते का दायरा और बढ़ाया जा सकता है।

कितनी बड़ी है यह डील?

जानकारी के अनुसार भारत-वियतनाम ब्रह्मोस समझौते का मूल्य करीब 60 अरब रुपये बताया जा रहा है। यह भारत के रक्षा निर्यात इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण डीलों में से एक मानी जा रही है।

इंडोनेशिया के साथ भी अंतिम दौर में बातचीत

भारतीय रक्षा अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि इंडोनेशिया के साथ भी ब्रह्मोस मिसाइल निर्यात पर बातचीत अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। यदि यह समझौता भी पूरा होता है तो इंडोनेशिया ब्रह्मोस खरीदने वाला तीसरा देश बन सकता है। इससे दक्षिण-पूर्व एशिया में भारत की रणनीतिक उपस्थिति और मजबूत होगी।

इस डील से क्यों बढ़ सकती है चीन की चिंता?

वियतनाम और फिलीपींस दोनों ऐसे देश हैं जिनके चीन के साथ दक्षिण चीन सागर को लेकर विवाद रहे हैं। ऐसे में इन देशों के पास ब्रह्मोस जैसी अत्याधुनिक सुपरसोनिक मिसाइलों का पहुंचना क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकता है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इससे समुद्री सुरक्षा क्षमता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी।

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