पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने शुक्रवार को जानकारी देते हुए बताया कि यह कदम ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया है। हाल ही में पश्चिम एशिया में लंबे समय तक चले संघर्ष के दौरान वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर पड़े असर को देखते हुए यह फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मध्य पूर्व संकट का असर और भारत की निर्भरता
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है। युद्ध के दौरान हुए व्यवधान के कारण कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और LPG की आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ा था। आंकड़ों के अनुसार, भारत की लगभग 40 प्रतिशत कच्चे तेल की आपूर्ति, 65 प्रतिशत प्राकृतिक गैस और करीब 90 प्रतिशत LPG आयात इन्हीं क्षेत्रों से होता है।
तेल कंपनियों को दिए गए निर्देश
केंद्र सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख तेल कंपनियों Indian Oil Corporation, Bharat Petroleum Corporation और Hindustan Petroleum Corporation को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वे अपने नियमित स्टॉक से अलग एक अतिरिक्त रणनीतिक भंडार तैयार करें। यह भंडार 30 दिनों की मांग को पूरा करने में सक्षम होगा और किसी भी आपात स्थिति में सप्लाई चेन को टूटने से बचाएगा। इसे ऊर्जा सुरक्षा की दृष्टि से एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
मौजूदा स्थिति पर सरकार का दावा
सरकार के अनुसार देश में फिलहाल पेट्रोल, डीजल, LPG, कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। रिफाइनरियां पूरी क्षमता से उत्पादन कर रही हैं और LPG का उत्पादन भी रिकॉर्ड स्तर लगभग 52,000 टन प्रतिदिन तक पहुंच चुका है। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि फिलहाल किसी भी वितरण केंद्र पर LPG की कमी की सूचना नहीं है और सप्लाई व्यवस्था सामान्य रूप से चल रही है।
सरकार की आगे की रणनीति
सरकार अब केवल LPG ही नहीं, बल्कि कच्चे तेल के रणनीतिक भंडारण को भी मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वैश्विक संकट या आपूर्ति बाधा की स्थिति में भी देश की ऊर्जा जरूरतें बिना रुकावट पूरी हो सकें।

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