लखनऊ के ग्रामीण इलाकों में बढ़े सर्किल रेट
जिला प्रशासन ने विभिन्न तहसीलों के कई गांवों में कृषि भूमि के सर्किल रेट में संशोधन करने का फैसला लिया है। कई स्थानों पर दरों में दोगुने से भी अधिक की वृद्धि प्रस्तावित की गई है। मोहनलालगंज तहसील के कई गांव इस बदलाव से सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे। यहां कृषि योग्य जमीनों के सर्किल रेट में बड़ी बढ़ोतरी की गई है, जिससे जमीन खरीदने वालों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
क्यों बढ़ाए गए सर्किल रेट?
पिछले कुछ वर्षों में लखनऊ के आसपास तेजी से शहरीकरण हुआ है। नगर निगम क्षेत्र के विस्तार के साथ ग्रामीण इलाकों में आवासीय परियोजनाएं, प्लॉटिंग, अपार्टमेंट और रो-हाउस परियोजनाएं बढ़ी हैं। ऐसे में जमीनों की बाजार कीमतें लगातार बढ़ती गईं, जबकि सरकारी सर्किल रेट अपेक्षाकृत कम बने रहे। प्रशासन द्वारा कराए गए सर्वे में पाया गया कि कई गांवों में जमीनों की खरीद-बिक्री सरकारी दरों से कहीं अधिक कीमत पर हो रही है। इसी वजह से बाजार मूल्य और सर्किल रेट के बीच की दूरी को कम करने के लिए यह कदम उठाया गया है।
इन क्षेत्रों पर पड़ेगा असर
प्रस्तावित संशोधन के तहत मोहनलालगंज के अलावा सरोजनीनगर, मलिहाबाद, बख्शी का तालाब और सदर तहसील के कई गांवों में भी कृषि भूमि के सर्किल रेट बढ़ाने की योजना बनाई गई है। इन इलाकों में जमीन खरीदने वाले लोगों को अब पहले से ज्यादा स्टांप शुल्क देना पड़ सकता है। विशेष रूप से सड़क किनारे स्थित कृषि भूमि वाले गांवों में सर्किल रेट में अधिक वृद्धि की गई है, क्योंकि इन क्षेत्रों में विकास की रफ्तार तेज रही है और जमीन की मांग लगातार बढ़ी है।
राजस्व बढ़ाने पर फोकस
प्रशासन का कहना है कि राज्य सरकार ने स्टांप एवं पंजीकरण विभाग के राजस्व लक्ष्य में भी बढ़ोतरी की है। पिछले वित्तीय वर्ष में विभाग ने लक्ष्य से अधिक राजस्व प्राप्त किया था। अब नए वित्तीय वर्ष के लिए और बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया गया है। ऐसे में सर्किल रेट और वास्तविक बाजार मूल्य के बीच अंतर को कम करना जरूरी माना गया।
आपत्ति और सुझाव का मौका
नई दरों को लागू करने से पहले आम लोगों से आपत्तियां और सुझाव भी मांगे गए हैं। इच्छुक नागरिक निर्धारित तिथि तक संबंधित कार्यालयों या ईमेल के माध्यम से अपनी राय दर्ज करा सकते हैं। प्राप्त सुझावों और आपत्तियों पर सुनवाई के बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

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