बिहार में शिक्षकों को बड़ा मौका, 1 जून से फिर शुरू होगी ट्रेनिंग

पटना। बिहार के शिक्षकों के लिए एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। ऐसे शिक्षक जो पिछले शैक्षणिक सत्र में विभिन्न कारणों से प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाए थे, उन्हें अब दोबारा मौका मिलने जा रहा है। राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) ने प्रशिक्षण से वंचित शिक्षकों के लिए विशेष व्यवस्था करते हुए उन्हें आगामी प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल करने का निर्णय लिया है।

प्रशिक्षण से छूटे शिक्षकों को मिलेगा लाभ

पिछले शैक्षणिक सत्र के दौरान कई शिक्षक सरकारी जिम्मेदारियों, प्रशासनिक कार्यों या व्यक्तिगत कारणों के चलते प्रशिक्षण प्राप्त नहीं कर सके थे। ऐसे शिक्षकों की संख्या काफी अधिक थी, जिसके कारण शिक्षा विभाग ने उनकी समस्या को गंभीरता से लिया। अब इन सभी शिक्षकों को प्रशिक्षण पूरा करने का अवसर दिया जाएगा ताकि उनकी पेशेवर दक्षता और शिक्षण कौशल में सुधार हो सके।

1 जून से शुरू होगा प्रशिक्षण कार्यक्रम

शिक्षा विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, प्रशिक्षण से वंचित शिक्षक 1 जून 2026 से अपने निर्धारित प्रशिक्षण केंद्रों पर पहुंचकर कार्यक्रम में भाग ले सकेंगे। यह पहल उन शिक्षकों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद होगी जो पूर्व में किसी कारणवश प्रशिक्षण प्रक्रिया का हिस्सा नहीं बन पाए थे।

प्रशिक्षण संस्थानों को दिए गए निर्देश

एससीईआरटी ने जिला स्तर के अधिकारियों और प्रशिक्षण संस्थानों को निर्देश जारी कर प्रशिक्षण कार्यक्रम की सभी तैयारियां समय पर पूरी करने को कहा है। संस्थानों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि प्रशिक्षण का संचालन व्यवस्थित और बिना किसी रुकावट के हो। इसके लिए आवश्यक संसाधन, प्रशिक्षण सामग्री और अन्य व्यवस्थाएं पहले से उपलब्ध कराई जाएंगी।

शिक्षकों की क्षमता बढ़ाने पर जोर

नई शिक्षा नीतियों और आधुनिक शिक्षण पद्धतियों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए शिक्षकों का नियमित प्रशिक्षण बेहद जरूरी माना जाता है। प्रशिक्षण के माध्यम से शिक्षकों को नई तकनीकों, नवाचारों और बेहतर शिक्षण विधियों की जानकारी मिलती है, जिससे छात्रों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त होती है।

शिक्षकों में खुशी का माहौल

शिक्षा विभाग के इस फैसले से उन शिक्षकों को बड़ी राहत मिली है जो मजबूरी में प्रशिक्षण से दूर रह गए थे। अब उन्हें न केवल प्रशिक्षण पूरा करने का अवसर मिलेगा, बल्कि वे अपने पेशेवर विकास को भी नई दिशा दे सकेंगे। माना जा रहा है कि इस पहल से राज्य के स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता को और बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।

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