क्यों लिया गया यह बड़ा फैसला?
पिछले कुछ महीनों से वेस्ट एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक खाड़ी देशों पर निर्भर है। आंकड़ों के अनुसार लगभग 40% क्रूड ऑयल, 65% नेचुरल गैस और 90% एलपीजी भारत को आयात के जरिए खाड़ी देशों से प्राप्त होता है। ऐसे में किसी भी वैश्विक संकट का सीधा असर घरेलू सप्लाई पर पड़ सकता है।
30 दिन का गैस रिजर्व बनाने की योजना
पेट्रोलियम मंत्रालय ने तेल कंपनियों को मौजूदा कमर्शियल स्टॉक के अलावा अतिरिक्त स्टोरेज क्षमता विकसित करने के निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी आपात स्थिति में देश के भीतर कम से कम एक महीने तक एलपीजी की सप्लाई बिना रुकावट जारी रह सके।
सप्लाई को लेकर सरकार की स्थिति
सरकारी अधिकारियों के अनुसार देश में फिलहाल पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और अन्य ईंधनों का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। रिफाइनरियां पूरी क्षमता पर उत्पादन कर रही हैं और घरेलू एलपीजी का उत्पादन भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है, जो लगभग 52,000 टन प्रतिदिन बताया जा रहा है। सरकार ने यह भी साफ किया है कि किसी भी तरह की कमी की स्थिति नहीं है और उपभोक्ताओं को घबराने की जरूरत नहीं है।
पैनिक बाइंग से बचने की अपील
हालांकि कुछ जगहों पर पेट्रोल पंपों और गैस वितरण केंद्रों पर भीड़ देखी गई है, लेकिन सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह वास्तविक कमी के कारण नहीं बल्कि मांग में अस्थायी बढ़ोतरी की वजह से है। लोगों से अपील की गई है कि वे जरूरत से ज्यादा खरीदारी या पैनिक बाइंग से बचें।
सरकार अब दीर्घकालिक रणनीति के तहत देश को ऊर्जा के मामले में अधिक सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम कर रही है। स्ट्रैटेजिक रिजर्व का यह कदम किसी भी अंतरराष्ट्रीय संकट के दौरान भारत की ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
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