क्या है पूरा मामला?
राज्य में लंबे समय से यह विवाद चल रहा था कि नए कनेक्शन और पुराने कनेक्शनों पर केवल प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं। उपभोक्ताओं और उपभोक्ता परिषद ने इस पर आपत्ति जताई थी और इसे अनिवार्य करने के खिलाफ मामला उठाया गया था। इसके बाद यह मुद्दा विद्युत नियामक आयोग तक पहुंचा, जहां इस पर विस्तृत सुनवाई की गई।
आयोग का स्पष्ट आदेश
आयोग ने विद्युत अधिनियम-2003 की धारा 47(5) का हवाला देते हुए कहा है कि उपभोक्ता अपनी सुविधा के अनुसार प्रीपेड या पोस्टपेड मीटर का चुनाव कर सकते हैं। किसी भी स्थिति में चयन का अधिकार उपभोक्ता के पास ही रहेगा।
बिजली कंपनियों पर लगेगी रोक
इस निर्णय के बाद बिजली वितरण कंपनियां उपभोक्ताओं पर प्रीपेड मीटर लगाने का दबाव नहीं बना पाएंगी। अब किसी भी कनेक्शन को बिना उपभोक्ता की सहमति के प्रीपेड में बदला नहीं जा सकेगा। यह नियम नए और पुराने दोनों प्रकार के कनेक्शनों पर लागू होगा।
उपभोक्ताओं के हित में बड़ा कदम
उपभोक्ता परिषद ने इस फैसले को ऐतिहासिक बताया है। उनका कहना है कि यह देश का पहला ऐसा राज्य है जहां स्पष्ट रूप से उपभोक्ता को मीटर चयन का अधिकार दिया गया है। इससे उपभोक्ताओं को अपनी सुविधा और बजट के अनुसार विकल्प चुनने की आज़ादी मिलेगी।
नए कनेक्शन पर भी लागू होगा नियम
आयोग ने साफ किया है कि चाहे नया कनेक्शन हो या पुराना, दोनों ही मामलों में उपभोक्ता को मीटर का प्रकार चुनने का अधिकार रहेगा। बिजली कंपनियों को अब नियमों और अधिनियम के अनुसार ही काम करना होगा। अब बिजली कंपनियां किसी उपभोक्ता के पोस्टपेड कनेक्शन को बिना अनुमति के प्रीपेड में नहीं बदल सकेंगी। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और उपभोक्ताओं के अधिकार सुरक्षित रहेंगे।

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