इसके साथ ही लंबे समय से चली आ रही ठेकेदारी व्यवस्था को समाप्त करने की दिशा में भी बड़ा कदम उठाया गया है। सरकार का दावा है कि इस फैसले से हजारों परिवारों को रोजगार सुरक्षा मिलेगी और कर्मचारियों को उनके अधिकारों के साथ सम्मानजनक कार्य वातावरण भी प्राप्त होगा।
क्या है सरकार का फैसला?
कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब बड़ी संख्या में आउटसोर्स और कच्चे कर्मचारी सीधे सरकार के अधीन कार्य करेंगे। पहले जहां कर्मचारियों को ठेकेदारों या एजेंसियों के माध्यम से नियुक्त किया जाता था, वहीं नई व्यवस्था में सरकार सीधे उनकी नियुक्ति और सेवा शर्तों का प्रबंधन करेगी। इस कदम को राज्य के रोजगार ढांचे में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
कर्मचारियों को मिलेंगे ये बड़े लाभ
सरकार की नई नीति के तहत नियमित होने वाले कर्मचारियों को कई महत्वपूर्ण सुविधाएं मिलेंगी। जैसे नौकरी की स्थिरता और सुरक्षा, वेतन सीधे बैंक खाते में जमा, भविष्य निधि (PF) का लाभ, कर्मचारी राज्य बीमा (ESI) सुविधा, ग्रेच्युटी का लाभ, अन्य सरकारी कर्मचारी सुविधाओं तक पहुंच। इससे कर्मचारियों को ठेका व्यवस्था से जुड़ी अनिश्चितताओं से राहत मिलेगी।
जोखिम भरे काम करने वालों को राहत
सरकार ने अग्निशमन सेवा, सीवर सफाई और लाइनमैन जैसे जोखिमपूर्ण कार्यों में लगे कर्मचारियों के लिए भी विशेष प्रावधान किया है। ऐसे कर्मचारियों को स्थायी सेवा का लाभ पहले की तुलना में कम समय में मिल सकेगा, जिससे उनकी रोजगार सुरक्षा और मजबूत होगी।
बकाया और महंगाई भत्ते पर भी दिया ध्यान
राज्य सरकार ने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों से जुड़े लंबित मामलों के समाधान के लिए एक विशेष कैबिनेट उप-समिति के गठन का भी निर्णय लिया है। यह समिति बकाया भुगतान, महंगाई भत्ता और अन्य वित्तीय मामलों पर काम करेगी।
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