बिहार में बनेगा खतियान और नक्शा, जमीन मालिकों को खुशखबरी!

पटना। बिहार सरकार ने भूमि रिकॉर्ड व्यवस्था को आधुनिक और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। हाल ही में हुई मंत्रिमंडल बैठक में बिहार विशेष सर्वेक्षण एवं बंदोबस्त (संशोधन) नियमावली, 2026 को मंजूरी दे दी गई है। इस निर्णय के बाद राज्य में जमीन से जुड़े रिकॉर्ड सिस्टम में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।

अब शहरों में भी होगा विशेष भू-सर्वेक्षण

अब तक यह सर्वेक्षण मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों तक सीमित था, जहां रैयती और अन्य प्रकार की जमीनों का नया खतियान और भू-नक्शा तैयार किया जा रहा था। लेकिन नए नियम लागू होने के बाद शहरी क्षेत्रों को भी इस प्रक्रिया में शामिल कर लिया गया है। इससे राज्य के सभी भू-भागों का एक समान डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा, जिससे जमीन से जुड़े विवादों में कमी आने की उम्मीद है।

नियमों में बदलाव से होगा काम आसान

सरकार ने सर्वे प्रक्रिया को अधिक सरल और प्रभावी बनाने के लिए पुराने नियमों में संशोधन किया है। कुछ प्रावधानों को अपडेट किया गया है, जबकि कुछ अप्रासंगिक नियमों को हटाया गया है। इसके अलावा भू-सर्वेक्षण से जुड़े नए शब्दों और प्रक्रियाओं की स्पष्ट परिभाषा तय की जाएगी, ताकि किसी भी स्तर पर भ्रम की स्थिति न रहे और काम में पारदर्शिता बनी रहे।

डिजिटल रिकॉर्ड सिस्टम को मिलेगा बढ़ावा

नई नियमावली का मुख्य उद्देश्य भूमि रिकॉर्ड को पूरी तरह डिजिटल और भरोसेमंद बनाना है। इससे न केवल खतियान और नक्शा अपडेट होगा, बल्कि भविष्य में जमीन खरीद-बिक्री और मालिकाना हक से जुड़े मामलों में भी आसानी होगी। सरकार का मानना है कि आधुनिक तकनीक के उपयोग से सर्वे कार्य तेज गति से पूरा किया जा सकेगा और नागरिकों को बेहतर सेवाएं मिलेंगी।

जमीन विवादों में आएगी कमी

डिजिटल नक्शा और अपडेटेड खतियान तैयार होने से जमीन से जुड़े विवादों में काफी कमी आने की संभावना है। एकीकृत रिकॉर्ड सिस्टम के माध्यम से हर जमीन का स्पष्ट विवरण उपलब्ध होगा, जिससे गलतफहमी और कानूनी झगड़ों से बचा जा सकेगा।

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