योगी सरकार का बड़ा फैसला: यूपी में अब काम नहीं मिलने पर मिलेगा बेरोजगारी भत्ता, 1 जुलाई से लागू

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले मजदूरों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। योगी सरकार ने रोजगार से जुड़ी नई व्यवस्था को मंजूरी दे दी है। अब अगर पंजीकरण कराने के बाद भी मजदूरों को तय समय पर काम नहीं मिलता है, तो उन्हें सरकार की ओर से बेरोजगारी भत्ता दिया जाएगा।

राज्य में 1 जुलाई से विकसित भारत- रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन ग्रामीण (वीबी जीरामजी) योजना लागू होने जा रही है। इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को रोजगार उपलब्ध कराना और जरूरत पड़ने पर आर्थिक सहायता देना है।

15 दिन में काम नहीं मिला तो मिलेगा भत्ता

नई योजना के तहत मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराने की समय सीमा तय की गई है। अगर किसी मजदूर ने योजना के तहत काम के लिए पंजीकरण कराया और 15 दिनों के अंदर उसे रोजगार नहीं दिया गया, तो 16वें दिन से उसे बेरोजगारी भत्ता मिलने का प्रावधान है। इसके अलावा अगर मजदूरी भुगतान में देरी होती है तो मजदूरों को अतिरिक्त मुआवजा भी मिलेगा। भुगतान में देरी होने पर प्रतिदिन 0.05 प्रतिशत की दर से विलंब राशि देने की व्यवस्था की गई है।

एक साल में मिलेगा 125 दिन तक रोजगार

इस योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों के अकुशल श्रमिकों को एक वित्तीय वर्ष में अधिकतम 125 दिनों तक रोजगार देने का लक्ष्य रखा गया है। मजदूरी का भुगतान मास्टर रोल बंद होने के 15 दिनों के भीतर करना होगा। अगर तय समय में भुगतान नहीं होता है तो नियम के अनुसार मुआवजा दिया जाएगा।

खेती के मौसम में नहीं होंगे कुछ काम

योजना में खेती के व्यस्त समय को ध्यान में रखते हुए खास व्यवस्था की गई है। कृषि कार्यों के लिए व्यस्त सीजन में करीब 60 दिन आरक्षित रखे जाएंगे। इस अवधि में योजना के तहत रोजगार कार्य नहीं चलाए जाएंगे, ताकि मजदूर खेती से जुड़े कामों में भी हिस्सा ले सकें।

केंद्र और राज्य मिलकर उठाएंगे खर्च

इस योजना का खर्च केंद्र और राज्य सरकार मिलकर उठाएंगी। कुल खर्च में 60 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार और 40 प्रतिशत हिस्सा उत्तर प्रदेश सरकार वहन करेगी। योजना की निगरानी और संचालन की जिम्मेदारी जिला, मध्यवर्ती और ग्राम स्तर की पंचायतों को दी जाएगी।

ग्रामीण मजदूरों को मिलेगा सहारा

योगी सरकार की इस नई योजना से ग्रामीण मजदूरों को रोजगार की गारंटी मिलने के साथ-साथ समय पर काम नहीं मिलने की स्थिति में आर्थिक मदद भी मिल सकेगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाने और आजीविका मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

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