यूपी में सभी 'ग्राम प्रधानों' की कुर्सी पर संकट, पढ़ें पूरी रिपोर्ट

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की ग्राम पंचायतों में एक बार फिर सियासी हलचल तेज हो गई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक अहम आदेश के बाद प्रदेश के हजारों ग्राम प्रधानों की स्थिति को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। पंचायतों में प्रशासक के तौर पर काम कर रहे प्रधानों की भूमिका अब सवालों के घेरे में आ गई है। वहीं, चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे संभावित उम्मीदवारों की सक्रियता भी बढ़ गई है।

प्रधानों का कार्यकाल खत्म होने के बाद मिली थी जिम्मेदारी

प्रदेश में ग्राम प्रधानों का निर्धारित कार्यकाल 26 मई को पूरा हो चुका था। इसके बाद सरकार ने पंचायतों का कामकाज प्रभावित न हो, इसके लिए मौजूदा प्रधानों को प्रशासक की जिम्मेदारी सौंप दी थी। हालांकि, इस व्यवस्था के तहत उन्हें सीमित अधिकार ही दिए गए थे। प्रशासक के रूप में प्रधान पुराने कार्यों को आगे बढ़ा सकते थे, लेकिन नए विकास कार्य शुरू करने के लिए उन्हें प्रशासन से अनुमति लेने की जरूरत थी। इसके चलते पंचायतों के कामकाज पर भी असर पड़ रहा था।

हाईकोर्ट के आदेश से बढ़ी बेचैनी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पंचायतों में प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए इसे संवैधानिक व्यवस्था के अनुरूप नहीं माना है। कोर्ट ने सरकार से त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर स्पष्ट योजना पेश करने को कहा है। अब इस मामले में अगली सुनवाई 13 जुलाई को होनी है। इस सुनवाई पर पंचायतों से जुड़े लोगों की नजरें टिकी हुई हैं। माना जा रहा है कि सरकार के जवाब के बाद आगे की स्थिति साफ हो सकती है।

चुनाव की उम्मीद से दावेदार सक्रिय

हाईकोर्ट के फैसले के बाद ग्राम प्रधान पद के संभावित उम्मीदवारों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। गांवों में बैठकों और जनसंपर्क का दौर बढ़ने लगा है। कई लोग इसे जल्द पंचायत चुनाव की संभावना से जोड़कर देख रहे हैं। वहीं, मौजूदा प्रधानों में भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है क्योंकि उनकी प्रशासक के रूप में भूमिका पर फैसला आने वाले दिनों में हो सकता है।

पंचायतों में बदल सकता है सियासत

प्रदेश की पंचायत राजनीति में ग्राम प्रधानों का पद काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में चुनाव को लेकर बढ़ती चर्चाओं ने गांव स्तर पर राजनीतिक गतिविधियों को तेज कर दिया है। अब सबकी नजर 13 जुलाई की सुनवाई पर है। कोर्ट और सरकार के अगले कदम से ही तय होगा कि मौजूदा व्यवस्था जारी रहेगी या पंचायत चुनाव की प्रक्रिया जल्द शुरू होगी।

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