रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार देश की आर्थिक स्थिति और बजट पर पड़ने वाले अतिरिक्त बोझ को ध्यान में रखते हुए फिटमेंट फैक्टर को बहुत ज्यादा बढ़ाने के बजाय संतुलित रखने पर विचार कर सकती है। हालांकि, अभी तक सरकार की ओर से अंतिम फैसला जारी नहीं किया गया है।
फिटमेंट फैक्टर पर क्यों हो रही चर्चा?
फिटमेंट फैक्टर वह आधार होता है, जिसके जरिए कर्मचारियों की बेसिक सैलरी तय की जाती है। 7वें वेतन आयोग में इसे 2.57 रखा गया था। इसी के आधार पर न्यूनतम बेसिक सैलरी में बड़ा बदलाव हुआ था। अब कर्मचारी संगठन 8वें वेतन आयोग में ज्यादा फिटमेंट फैक्टर की मांग कर रहे हैं। कई संगठनों का कहना है कि बढ़ती महंगाई और जीवन-यापन की लागत को देखते हुए सैलरी में ज्यादा बढ़ोतरी होनी चाहिए।
कर्मचारी संगठनों की क्या मांग है?
कई कर्मचारी यूनियन फिटमेंट फैक्टर को बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। उनकी मांग है कि नया फिटमेंट फैक्टर मौजूदा स्तर से ज्यादा रखा जाए, जिससे न्यूनतम वेतन में बड़ी बढ़ोतरी हो सके। अगर मांग के अनुसार बड़ा फिटमेंट फैक्टर लागू किया जाता है तो सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय भार बढ़ सकता है। इसी वजह से सरकार आर्थिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए फैसला ले सकती है।
2.57 के आसपास रहा तो क्या होगा?
अगर 8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 7वें वेतन आयोग के करीब रखा जाता है, तब भी कर्मचारियों को लाभ मिलने की उम्मीद है। महंगाई भत्ता और अन्य भत्तों को शामिल करने के बाद बेसिक सैलरी में बढ़ोतरी हो सकती है। अलग-अलग पे लेवल के हिसाब से कर्मचारियों और अधिकारियों की कुल सैलरी में भी बदलाव देखने को मिल सकता है।
पेंशनर्स को भी मिलेगा फायदा
8वें वेतन आयोग का असर सिर्फ कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पेंशनर्स पर भी पड़ेगा। पेंशन की गणना और उसमें होने वाले बदलाव नए वेतन आयोग की सिफारिशों पर निर्भर करेंगे। सरकार की कोशिश होगी कि कर्मचारियों को राहत मिले और साथ ही देश के बजट पर ज्यादा दबाव भी न पड़े।
अंतिम फैसला कब आएगा?
फिलहाल फिटमेंट फैक्टर को लेकर अलग-अलग रिपोर्ट सामने आ रही हैं, लेकिन सरकार की आधिकारिक घोषणा का इंतजार है। अंतिम निर्णय वेतन आयोग की सिफारिशों और सरकार की मंजूरी के बाद ही साफ होगा।

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