नई व्यवस्था के तहत जिलों में लेखपालों के लिए एक तय कार्यक्रम बनाया जाएगा, जिसके अनुसार उन्हें ग्राम सचिवालयों में बैठना होगा। इसका उद्देश्य यह है कि ग्रामीणों को अपने जरूरी कामों के लिए सीधे स्थानीय स्तर पर सहायता मिल सके और सरकारी सेवाओं में तेजी आए।
ग्रामीणों को मिलेगी बड़ी राहत
गांवों में रहने वाले लोगों को अक्सर खसरा-खतौनी, प्रमाण पत्र, जमीन से जुड़े सत्यापन और अन्य राजस्व कार्यों के लिए लेखपालों की जरूरत पड़ती है। कई बार लेखपाल से संपर्क नहीं हो पाने के कारण लोगों को तहसील के चक्कर लगाने पड़ते थे। अब ग्राम सचिवालय में लेखपालों की मौजूदगी से लोगों को अपने क्षेत्र में ही समाधान मिलने की उम्मीद है। इससे समय की बचत होगी और सरकारी प्रक्रिया भी आसान बनेगी।
कई जरूरी सेवाओं में होगी मदद
लेखपालों की भूमिका गांवों में काफी महत्वपूर्ण होती है। जमीन से जुड़े मामलों के अलावा किसान योजनाओं का सत्यापन, फसल की जानकारी, आपदा से नुकसान का आकलन, विरासत से जुड़े मामले और सरकारी योजनाओं की जांच जैसे काम भी उनके जिम्मे होते हैं। ग्राम स्तर पर उनकी उपलब्धता रहने से इन कामों में तेजी आने की संभावना है।
सरकार का फोकस पारदर्शी व्यवस्था पर
प्रदेश सरकार का जोर सरकारी सेवाओं को लोगों तक सीधे पहुंचाने पर है। ग्राम सचिवालयों को मजबूत करने के पीछे भी यही उद्देश्य है कि ग्रामीणों को छोटी-छोटी सेवाओं के लिए दूर न जाना पड़े। लेखपालों की नियमित उपस्थिति से शिकायतों का समाधान जल्दी हो सकेगा और प्रशासन की जवाबदेही भी बढ़ेगी।
1 जुलाई से प्रदेशभर शुरू होगी नई व्यवस्था
नई व्यवस्था को लागू करने के लिए जिलों में व्यवस्था तैयार की जा रही है। लेखपालों के बैठने का समय और दिन तय किए जाएंगे, जिससे ग्रामीणों को पता रहे कि किस दिन कौन-सी सुविधा उपलब्ध होगी। इस बदलाव के बाद गांवों में राजस्व सेवाओं का काम पहले से अधिक व्यवस्थित होने की उम्मीद है।

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