नई नीति लागू होने के बाद बाढ़, सूखा और पानी की कमी जैसी समस्याओं से निपटने के लिए पहले से बेहतर तैयारी की जा सकेगी। सरकार का लक्ष्य है कि पानी की हर बूंद का सही उपयोग हो और राज्य में जल प्रबंधन व्यवस्था को आधुनिक बनाया जाए।
नई वाटर अथॉरिटी बनाने की तैयारी
सरकार मौजूदा जल संसाधन संस्थाओं की समीक्षा कर रही है। जरूरत पड़ने पर नई वाटर अथॉरिटी और अन्य संस्थानों के गठन की तैयारी भी की जा रही है। इसके लिए जल संसाधन विभाग, नदी विकास और गंगा संरक्षण से जुड़े विभागों के साथ मिलकर एक नया सुधार ढांचा तैयार किया जा रहा है।
कई विभाग मिलकर बनाएंगे नई योजना
नई जल नीति को मजबूत बनाने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति बनाई गई है। इस समिति में जल संसाधन, कृषि, पर्यावरण, नगर विकास, ग्रामीण विकास, पीएचईडी और लघु जल संसाधन विभाग के अधिकारी शामिल हैं। यह समिति जल प्रबंधन से जुड़े सभी पहलुओं का अध्ययन कर नीति को अंतिम रूप देने का काम करेगी।
डिजिटल तकनीक से नदियों की निगरानी
नई व्यवस्था में नदियों और जल स्रोतों की निगरानी डिजिटल सिस्टम के जरिए की जाएगी। जलस्तर की जानकारी लगातार जुटाई जाएगी, जिससे बाढ़ जैसी स्थिति का पहले ही अनुमान लगाया जा सकेगा। इससे प्रशासन को समय रहते कदम उठाने में मदद मिलेगी और आपदा के दौरान होने वाले नुकसान को कम किया जा सकेगा।
इस योजना से किसानों को मिलेगा बड़ा लाभ
नई जल नीति का सबसे बड़ा फायदा किसानों को मिलने की उम्मीद है। नहरों में पानी के बेहतर प्रबंधन से खेतों तक समय पर सिंचाई का पानी पहुंचाने की योजना है। इससे खेती पर निर्भर किसानों को राहत मिलेगी और पानी की बर्बादी को भी कम किया जा सकेगा।
भूजल बचाने पर भी रहेगा सरकार का जोर
बिहार के कई इलाकों में भूजल स्तर को लेकर चिंता बढ़ रही है। नई नीति में भूजल संरक्षण और बेहतर इस्तेमाल पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके अलावा जल परियोजनाओं की डिजिटल निगरानी की जाएगी और पुराने नियमों को भी जरूरत के अनुसार अपडेट करने की तैयारी है।
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