वहीं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) को भी स्पेशियलिटी अस्पताल में बदला जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि लोगों को गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए बड़े शहरों या निजी अस्पतालों पर निर्भर न रहना पड़े और बेहतर चिकित्सा सुविधाएं अपने जिले में ही उपलब्ध हो सकें।
जिला अस्पतालों में मिलेंगी विशेषज्ञ सेवाएं
स्वास्थ्य मंत्री निशांत ने बताया कि राज्य में स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने के लिए बड़े स्तर पर काम चल रहा है। जिला अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवाएं, आधुनिक जांच सुविधाएं और बेहतर इलाज की व्यवस्था विकसित की जाएगी। इस बदलाव के बाद मरीजों को हृदय, न्यूरो, सर्जरी समेत कई गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए दूसरे शहरों का रुख कम करना पड़ेगा।
पांच जोन में बनाए जाएंगे ट्रामा सेंटर
राज्य में सड़क हादसों और आपातकालीन मरीजों को बेहतर इलाज देने के लिए ट्रामा सेंटर की संख्या बढ़ाई जा रही है। योजना के तहत बिहार के पांच जोन में 11 लेवल-3 और 5 लेवल-2 ट्रामा सेंटर विकसित किए जाएंगे। इसके अलावा एलएनजेपी अस्पताल में 400 बेड की नई सुविधा तैयार करने की योजना है।
अस्पतालों की निगरानी होगी हाईटेक
सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों और कर्मचारियों की मौजूदगी सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल निगरानी व्यवस्था लागू की जाएगी। इसके तहत राज्य के करीब 15 हजार अस्पतालों में सीसीटीवी कैमरे लगाने की योजना है। एक विशेष सॉफ्टवेयर के जरिए डॉक्टरों की उपस्थिति, ओपीडी सेवा, वार्ड राउंड और ऑपरेशन थिएटर से जुड़ी गतिविधियों का रिकॉर्ड रखा जाएगा। इसकी निगरानी मुख्यालय के कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से की जाएगी।
दवा और जांच सुविधाओं पर सरकार का फोकस
सरकार ने सरकारी अस्पतालों में दवाओं की उपलब्धता और गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने की बात कही है। मरीजों को समय पर जरूरी दवाएं मिलें, इसके लिए निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा। इसके साथ ही जिला अस्पतालों और सीएचसी में एमआरआई, सीटी स्कैन और अल्ट्रासाउंड जैसी आधुनिक जांच सुविधाएं उपलब्ध कराने की तैयारी है।

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