स्टांप एवं पंजीयन राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार रवींद्र जायसवाल ने इस फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि ऑनलाइन रजिस्ट्री की व्यवस्था लागू करने का उद्देश्य आम लोगों के लिए प्रक्रिया को आसान बनाना था, लेकिन शासनादेश में कुछ स्पष्टता की कमी के कारण गलतफहमी पैदा हो गई।
रजिस्ट्री प्रक्रिया आसान बनाने की थी तैयारी
सरकार की योजना थी कि विकास प्राधिकरणों और आवास विकास परिषद की ओर से बेची जाने वाली संपत्तियों के पहले पंजीकरण की प्रक्रिया को डिजिटल बनाया जाए। मौजूदा व्यवस्था में खरीदार, डीड राइटर या अधिवक्ता को प्राधिकरण से दस्तावेज लेकर उप निबंधक कार्यालय जाना पड़ता था।
नई व्यवस्था के तहत प्राधिकरण के अधिकृत अधिकारी द्वारा तैयार दस्तावेज ऑनलाइन माध्यम से संबंधित रजिस्ट्री कार्यालय भेजे जाने की योजना थी। इससे खरीदारों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत मिलने की उम्मीद थी।
विरोध के बाद लिया गया फैसला
ऑनलाइन रजिस्ट्री व्यवस्था को लेकर अधिवक्ताओं और डीड राइटर्स ने चिंता जताई थी। उनका कहना था कि नई व्यवस्था से उनके काम और रोजगार पर असर पड़ सकता है। इसी विरोध को देखते हुए सरकार ने स्थिति को स्पष्ट करने और सभी पक्षों की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए पुराने आदेश को वापस लेने का निर्णय लिया।
मंत्री रवींद्र जायसवाल ने कहा कि सरकार किसी भी वर्ग के हितों को प्रभावित नहीं करना चाहती। उन्होंने साफ किया कि अधिवक्ताओं और डीड राइटर्स की भूमिका को ध्यान में रखते हुए आगे की प्रक्रिया तैयार की जाएगी।
पारदर्शी व्यवस्था बनाने पर रहेगा जोर
सरकार का कहना है कि भविष्य में भी रजिस्ट्री प्रक्रिया को ज्यादा सरल, सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए सुधार किए जाएंगे। इसके लिए संबंधित पक्षों से बातचीत कर ऐसी व्यवस्था तैयार करने की कोशिश होगी, जिससे आम लोगों को सुविधा मिले और इससे जुड़े लोगों के हित भी सुरक्षित रहें।

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