क्या होता है फिटमेंट फैक्टर?
फिटमेंट फैक्टर एक ऐसा गुणक होता है, जिसके आधार पर पुराने वेतन को नए वेतन ढांचे में बदला जाता है। आसान भाषा में समझें तो वर्तमान बेसिक सैलरी को फिटमेंट फैक्टर से गुणा करने के बाद नई बेसिक सैलरी तय की जाती है। यही वजह है कि 8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर को सबसे अहम माना जा रहा है।
18 हजार रुपये बेसिक वालों की सैलरी?
अगर किसी केंद्रीय कर्मचारी की मौजूदा बेसिक सैलरी 18,000 रुपये है और फिटमेंट फैक्टर 2.10 तय होता है, तो नई बेसिक सैलरी करीब 37,800 रुपये हो सकती है। वहीं कर्मचारी संगठनों की ओर से अगर मांगा जा रहा 3.83 फिटमेंट फैक्टर लागू होता है तो यही बेसिक सैलरी लगभग 68,940 रुपये तक पहुंच सकती है।
अलग-अलग लेवल के कर्मचारियों पर असर
वेतन मैट्रिक्स के अलग-अलग स्तर पर भी फिटमेंट फैक्टर का बड़ा प्रभाव देखने को मिल सकता है।
लेवल-6 कर्मचारी: मौजूदा बेसिक वेतन करीब 35,400 रुपये है। 2.10 फिटमेंट फैक्टर के हिसाब से यह करीब 74,340 रुपये हो सकता है, जबकि 3.83 के हिसाब से यह लगभग 1.35 लाख रुपये तक पहुंच सकता है।
लेवल-10 अधिकारी: मौजूदा बेसिक सैलरी करीब 56,100 रुपये है। 2.10 के आधार पर यह करीब 1.17 लाख रुपये और 3.83 के आधार पर 2 लाख रुपये से ज्यादा हो सकती है।
लेवल-18 अधिकारी: इस स्तर पर वर्तमान बेसिक वेतन करीब 2.50 लाख रुपये है। 2.10 फिटमेंट फैक्टर पर यह करीब 5.25 लाख रुपये और 3.83 लागू होने पर करीब 9.57 लाख रुपये तक पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है।
कर्मचारियों को क्यों है बड़ी उम्मीद?
8वें वेतन आयोग से उम्मीद है कि वेतन संरचना में बदलाव के साथ महंगाई और मौजूदा खर्चों को ध्यान में रखा जाएगा। कर्मचारी संगठन लंबे समय से वेतन और भत्तों में सुधार की मांग करते रहे हैं। फिटमेंट फैक्टर बढ़ने से न सिर्फ बेसिक सैलरी बढ़ेगी, बल्कि इससे जुड़े कई भत्तों पर भी असर पड़ सकता है।
अभी अंतिम फैसला बाकी
फिलहाल फिटमेंट फैक्टर को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। सरकार की ओर से अंतिम निर्णय आने के बाद ही साफ होगा कि कर्मचारियों की सैलरी में वास्तव में कितना बदलाव होगा। 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद देश के लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए यह बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।

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