NCTE ने अदालत में दाखिल हलफनामे में कहा है कि स्कूल शिक्षकों की नियुक्ति और प्रमोशन के लिए TET को न्यूनतम योग्यता के तौर पर लागू किया गया है। परिषद के अनुसार इस नियम में सामान्य तौर पर छूट देने का प्रावधान नहीं है।
भर्ती के साथ प्रमोशन में भी जरूरी होगा TET
NCTE ने अपने पक्ष में बताया कि TET केवल शिक्षक बनने के लिए ही नहीं, बल्कि शिक्षकों की पदोन्नति से जुड़े मामलों में भी महत्वपूर्ण योग्यता है। साल 2014 के नियमों में TET को शिक्षक नियुक्ति के साथ-साथ प्रमोशन के लिए भी आवश्यक योग्यता के रूप में शामिल किया गया था। यानी जो शिक्षक आगे पदोन्नति पाना चाहते हैं, उनके लिए भी यह योग्यता जरूरी मानी जा रही है।
केंद्र सरकार भी नहीं दे सकती TET से छूट
NCTE के अनुसार 8 नवंबर 2010 को जारी दिशा-निर्देशों में यह साफ किया गया था कि अगर किसी राज्य में प्रशिक्षित शिक्षकों की कमी है तो कुछ शैक्षणिक योग्यताओं में सीमित समय के लिए राहत दी जा सकती है। हालांकि TET पास करने की अनिवार्यता को लेकर किसी तरह की छूट देने का प्रावधान नहीं रखा गया है। यानी शिक्षक पात्रता परीक्षा को लेकर नियम अलग हैं।
पुराने शिक्षकों को लेकर भी स्थिति साफ
NCTE ने अपने हलफनामे में पुराने शिक्षकों की स्थिति को भी स्पष्ट किया है। इसके अनुसार 3 सितंबर 2001 से पहले नियुक्त शिक्षकों पर बाद में लागू की गई शिक्षक प्रशिक्षण योग्यता का असर नहीं पड़ेगा। वहीं इसके बाद नियुक्त शिक्षकों, खासकर 23 अगस्त 2010 और 29 जुलाई 2011 के बाद नियुक्त शिक्षकों के लिए TET की अनिवार्यता लागू मानी गई है।
NCTE को योग्यता तय करने का अधिकार
परिषद ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि NCTE अधिनियम 1993 और शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 (RTE Act) के तहत शिक्षकों की न्यूनतम योग्यता तय करने का अधिकार उसे मिला हुआ है। इसी अधिकार के आधार पर साल 2010 और 2014 में नियम जारी किए गए, जिनमें कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए TET को जरूरी किया गया।
TET लागू करने का उद्देश्य क्या है?
NCTE का कहना है कि TET का उद्देश्य शिक्षकों की गुणवत्ता में सुधार करना और देशभर में शिक्षा के लिए एक समान मानक तैयार करना है। परीक्षा के जरिए यह सुनिश्चित करने की कोशिश की जाती है कि शिक्षक बनने वाले उम्मीदवारों के पास विषय ज्ञान के साथ-साथ पढ़ाने की जरूरी क्षमता भी हो।
बिहार के शिक्षकों और अभ्यर्थियों पर असर
इस मामले का असर बिहार के शिक्षक अभ्यर्थियों और नौकरी कर रहे शिक्षकों पर भी पड़ सकता है। भर्ती प्रक्रिया और प्रमोशन से जुड़े मामलों में TET की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। फिलहाल अंतिम फैसला सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और आदेश पर निर्भर करेगा, लेकिन NCTE के रुख से साफ है कि वह शिक्षक गुणवत्ता बनाए रखने के लिए TET को अनिवार्य योग्यता के रूप में जारी रखने के पक्ष में है।

0 comments:
Post a Comment