सिंधु नदी भारत के इतिहास और संस्कृति से जुड़ी एक महत्वपूर्ण धरोहर मानी जाती है। लद्दाख में होने वाला सिंधु दर्शन कार्यक्रम हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करता है। हालांकि बिहार से लद्दाख तक की दूरी और यात्रा खर्च अधिक होने के कारण कई लोग इस धार्मिक यात्रा का हिस्सा नहीं बन पाते थे। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने यह योजना शुरू की है।
यात्रा के बाद खाते में आएगी सहायता राशि
इस योजना में पहले यात्री को अपनी यात्रा पूरी करनी होगी। इसके बाद यात्रा से जुड़े प्रमाण और खर्च की जानकारी देने पर सरकार की ओर से सहायता राशि दी जाएगी। लाभार्थी को यात्रा खर्च का आधा हिस्सा या फिर अधिकतम ₹20,000 रुपये तक की राशि मिलेगी। दोनों में से जो राशि कम होगी, वही सरकार द्वारा अनुदान के रूप में दी जाएगी। भुगतान सीधे बैंक खाते में डीबीटी के जरिए किया जाएगा।
किन लोगों को मिलेगा योजना का फायदा?
इस योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक का बिहार का निवासी होना जरूरी है। इसके अलावा:
उम्र 18 साल या उससे अधिक होनी चाहिए।
यात्रा पूरी होने के बाद ही सहायता राशि मिलेगी।
यात्रा खर्च से जुड़े बिल और प्रमाण देना जरूरी होगा।
एक व्यक्ति को सामान्य स्थिति में सिर्फ एक बार लाभ मिलेगा।
किसी अन्य समान सरकारी योजना से सहायता लेने वाले व्यक्ति पात्र नहीं होंगे।
हर साल सीमित यात्रियों को मिलेगा लाभ
सरकार ने इस योजना के तहत हर वित्तीय वर्ष में अधिकतम 100 यात्रियों को सहायता देने का फैसला किया है। चयन प्रक्रिया आवेदन मिलने के बाद पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर की जाएगी। योजना के लिए हर साल लगभग 20 लाख रुपये तक का बजट रखा गया है, जिससे चयनित यात्रियों को आर्थिक सहायता दी जा सके।
आवेदन के लिए जरूरी कागजात
योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक को पर्यटन निदेशालय, बिहार पटना में आवेदन करना होगा। आवेदन के साथ ये दस्तावेज जरूरी होंगे: आधार कार्ड, पैन कार्ड, निवास प्रमाण पत्र, यात्रा खर्च से संबंधित दस्तावेज, यात्रा पूरी होने का प्रमाण, आवश्यक घोषणा पत्र।
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