पंचायतों की सीमाओं में नहीं होगा बदलाव
पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश की ओर से जानकारी दी गई है कि आगामी चुनाव के लिए नई परिसीमन प्रक्रिया शुरू नहीं की जाएगी। इसका मतलब है कि जिन पंचायत क्षेत्रों में पहले चुनाव हुए थे, उन्हीं क्षेत्रों के आधार पर आगे की चुनावी प्रक्रिया पूरी की जाएगी। अगर परिसीमन होता तो कई पंचायतों की सीमाएं बदल सकती थीं और नए चुनावी समीकरण बन सकते थे। अब ऐसा नहीं होने से पुराने क्षेत्रीय समीकरण बने रहने की संभावना है।
आरक्षण व्यवस्था को लेकर भी अपडेट
पंचायत चुनाव में आरक्षण रोस्टर को लेकर भी सरकार ने स्थिति स्पष्ट की है। अधिकारियों के अनुसार आरक्षण से जुड़े नियमों का पालन कानून के अनुसार किया जाएगा। सरकार की कोशिश है कि आरक्षण प्रक्रिया पूरी तरह नियमों के तहत और पारदर्शी तरीके से पूरी हो, ताकि चुनाव प्रक्रिया में किसी तरह की परेशानी न आए।
चुनाव की तैयारियों में आएगी तेजी
परिसीमन नहीं होने के फैसले के बाद पंचायत चुनाव की प्रशासनिक तैयारियां तेजी से आगे बढ़ सकती हैं। परिसीमन की प्रक्रिया में लगने वाला समय बचने से चुनाव कार्यक्रम तय करने में आसानी होगी। अब सभी की नजर आरक्षण रोस्टर और चुनाव की आधिकारिक तारीखों की घोषणा पर रहेगी।
उम्मीदवारों को मिली बड़ी राहत
पंचायत चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे लोगों के लिए यह फैसला राहत देने वाला माना जा रहा है। परिसीमन नहीं होने से उन्हें अपने मौजूदा पंचायत क्षेत्र और चुनावी रणनीति में बड़े बदलाव नहीं करने पड़ेंगे। वहीं, पंचायतों में भी पुराने ढांचे के अनुसार चुनावी गतिविधियां आगे बढ़ने की उम्मीद है।

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