यूपी में बिजली उपभोक्ताओं को राहत, मिलेगी बड़ी खुशखबरी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। बिजली बिल में लगने वाले ईंधन और बिजली खरीद लागत समायोजन (एफपीपीसीए) को लेकर उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने सख्त कदम उठाया है। आयोग ने पावर कॉरपोरेशन को निर्देश दिए हैं कि एफपीपीसीए की गणना पूरी तरह पारदर्शी और तय नियमों के अनुसार की जाए।

आयोग के इस फैसले के बाद बिजली कंपनियां अब एफपीपीसीए में पुराने बकाये या अतिरिक्त राशि को जोड़कर उपभोक्ताओं पर बोझ नहीं डाल सकेंगी। इसका सीधा फायदा प्रदेश के लाखों बिजली उपभोक्ताओं को मिलने की उम्मीद है। माना जा रहा है कि जून महीने की बिजली खपत का जो बिल जुलाई में आएगा, उसमें उपभोक्ताओं को राहत मिल सकती है।

बिजली बिल में चार फीसदी तक कमी की उम्मीद

जानकारी के अनुसार, एफपीपीसीए की नई व्यवस्था लागू होने के बाद बिजली बिल में करीब चार प्रतिशत तक कमी देखने को मिल सकती है। उपभोक्ता संगठनों का कहना है कि जब भी एफपीपीसीए का निर्धारण नियमों के अनुसार किया गया है, तब उपभोक्ताओं को इसका लाभ मिला है।

राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने भी इस मामले को लेकर नियामक आयोग में आपत्ति दर्ज कराई थी। परिषद का कहना है कि पिछली अवधि में एफपीपीसीए की गणना में हुई गलतियों के कारण उपभोक्ताओं से अतिरिक्त राशि वसूली गई। अब इस राशि का समायोजन उपभोक्ताओं के हित में किया जा सकता है।

पारदर्शी प्रक्रिया से मिलेगा फायदा

नियामक आयोग के निर्देश के बाद बिजली कंपनियों को एफपीपीसीए लागू करने में नियमों का पालन करना होगा। इससे बिजली खरीद लागत के नाम पर लगने वाले अतिरिक्त शुल्क की सही गणना हो सकेगी और उपभोक्ताओं को अनावश्यक भुगतान से राहत मिलेगी।

अगर नई व्यवस्था के तहत समायोजन हुआ तो आने वाले बिजली बिलों में इसका असर साफ दिखाई दे सकता है। प्रदेश के घरेलू और छोटे बिजली उपभोक्ताओं को इस फैसले से सबसे ज्यादा राहत मिलने की संभावना है। इससे लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।

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