बंद पड़ी यूनिट की जमीन का होगा इस्तेमाल
नए पावर प्रोजेक्ट के लिए अलग से जमीन अधिग्रहण की जरूरत नहीं पड़ेगी। बरौनी के पुराने बिजली संयंत्र की खाली जमीन पर ही नई यूनिट स्थापित करने की योजना है। फिलहाल परियोजना से जुड़ी तकनीकी जांच और संभावनाओं का अध्ययन किया जा रहा है। संबंधित मंजूरी मिलने के बाद निर्माण कार्य आगे बढ़ने की उम्मीद है।
बिजली स्टोर करने की नई सुविधा
इस परियोजना में बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम लगाने की भी योजना है। यह बिहार के लिए एक नई पहल होगी। इस सुविधा से जरूरत के समय बिजली की उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिलेगी। जब बिजली की मांग कम होगी, तब अतिरिक्त ऊर्जा को सुरक्षित रखा जा सकेगा और ज्यादा खपत वाले समय में उसका उपयोग किया जा सकेगा।
पर्यावरण के लिए भी फायदेमंद
प्रस्तावित प्लांट में अल्ट्रा सुपर क्रिटिकल तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। यह तकनीक सामान्य बिजली संयंत्रों की तुलना में ज्यादा प्रभावी मानी जाती है। इससे बिजली उत्पादन के लिए कोयले की खपत कम हो सकती है। साथ ही प्रदूषण फैलाने वाली गैसों का उत्सर्जन घटेगा और पानी की जरूरत भी कम होगी।
बिहार में बढ़ेगी बिजली क्षमता
बरौनी के अलावा राज्य के कहलगांव और कांटी स्थित बिजली केंद्रों में भी नई यूनिट लगाने की संभावनाओं पर काम किया जा रहा है। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद बिहार की बिजली उत्पादन क्षमता मजबूत होगी और आने वाले समय में राज्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी।

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