इस योजना का उद्देश्य बिहार में आने वाले पर्यटकों को बेहतर ठहरने की सुविधा देना और स्थानीय लोगों को स्वरोजगार से जोड़ना है। खासकर पर्यटन स्थलों के आसपास रहने वाले लोगों के लिए यह योजना कमाई का अच्छा अवसर बन सकती है।
घर के कमरों को होमस्टे बनाएं, सरकार देगी सहायता
मुख्यमंत्री होमस्टे प्रोत्साहन योजना के तहत अगर कोई व्यक्ति अपने घर को होमस्टे के रूप में विकसित करता है तो उसे सरकार की ओर से प्रति कमरे ₹2.50 लाख रुपये तक की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। एक होमस्टे यूनिट में अधिकतम 8 कमरों को शामिल किया जा सकेगा। यानी मकान मालिक अपने घर के सीमित हिस्से को पर्यटकों के लिए तैयार कर कमाई कर सकते हैं।
सामान्य लोगों को 10 लाख तक की मदद
इस योजना में सामान्य श्रेणी के लाभार्थियों को अधिकतम 10 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता देने का प्रावधान है। वहीं महिलाओं, स्वयं सहायता समूहों और 18 से 25 वर्ष के युवाओं को अतिरिक्त लाभ मिलेगा। इन वर्गों के लिए 25 हजार रुपये तक की अतिरिक्त सहायता दी जाएगी, जिससे कुल सहायता राशि करीब 11 लाख रुपये तक पहुंच सकती है।
पुराने घर को भी बनाया जायेगा होमस्टे
इस योजना की खास बात यह है कि इसके लिए नया भवन बनाना जरूरी नहीं है। लोग अपने पुराने मकान को भी पर्यटकों के ठहरने लायक बनाकर योजना का लाभ ले सकते हैं। सरकार ने अगले 5 साल में करीब 1000 कमरों के विकास का लक्ष्य रखा है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यटन बढ़ेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
किन जगहों पर मिलेगा फायदा?
यह योजना फिलहाल बिहार के 16 जिलों के 34 पर्यटन स्थलों के लिए लागू की गई है। होमस्टे पर्यटन स्थल के 5 किलोमीटर के दायरे में होना जरूरी होगा। सरकार जरूरत के अनुसार आगे चलकर पर्यटन स्थलों की सूची में बदलाव या विस्तार भी कर सकती है।
कौन कर सकता है आवेदन?
योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक को कुछ जरूरी शर्तें पूरी करनी होंगी।
आवेदक के पास अपना घर या आवासीय इकाई होनी चाहिए।
होमस्टे में अधिकतम 8 कमरे ही होने चाहिए।
8 से ज्यादा कमरों वाली इकाई को होमस्टे की श्रेणी में शामिल नहीं किया जाएगा।
घर या जमीन किसी कानूनी विवाद में नहीं होनी चाहिए।
यह योजना पुराने और नए दोनों तरह के होमस्टे पर लागू होगी।
.png)
0 comments:
Post a Comment