वर्ष 1844 में स्थापित यह विद्यालय लंबे समय से शिक्षा का प्रमुख केंद्र रहा है। अब इसे नई तकनीक, बेहतर संसाधनों और आधुनिक शिक्षा प्रणाली के साथ तैयार करने की योजना है।
आधुनिक सुविधाओं से बदलेगी तस्वीर
मॉडल स्कूल योजना के तहत विद्यालय में कई बड़े बदलाव किए जाएंगे। शिक्षा विभाग के निर्देश के बाद स्कूल प्रशासन ने जरूरी सुविधाओं और संसाधनों को लेकर प्रस्ताव तैयार कर भेजा है। मौजूदा समय में विद्यालय में करीब 1300 छात्र पढ़ाई कर रहे हैं और 31 शिक्षक कार्यरत हैं। स्कूल परिसर में 19 कमरे, एक बड़ा हॉल और छात्रावास की सुविधा उपलब्ध है। लेकिन भविष्य में बढ़ती छात्र संख्या को देखते हुए अतिरिक्त कक्ष, नए भवन और बेहतर सुविधाओं की जरूरत महसूस की गई है।
डिजिटल पढ़ाई और आधुनिक लैब की सुविधा
नए स्वरूप में विद्यालय में छात्रों को डिजिटल माध्यम से पढ़ाई की सुविधा उपलब्ध कराने की तैयारी है। स्मार्ट क्लास, विजुअल लर्निंग और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से पढ़ाई को ज्यादा प्रभावी बनाया जाएगा। इसके अलावा विज्ञान विषय के छात्रों के लिए अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं और बेहतर संसाधनों वाली लाइब्रेरी विकसित करने की योजना है।
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी पर भी होगा जोर
मॉडल स्कूल बनने के बाद छात्रों के सर्वांगीण विकास पर ध्यान दिया जाएगा। विद्यार्थियों को शुरुआती स्तर से ही प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार करने की व्यवस्था की जाएगी। इसका उद्देश्य छात्रों को सिर्फ पाठ्यक्रम तक सीमित न रखते हुए भविष्य के करियर के लिए तैयार करना है।
बिहार के इन ऐतिहासिक विद्यालय को मिलेगा नया रूप
सरकार की इस पहल का मुख्य उद्देश्य पुराने और प्रतिष्ठित विद्यालयों को आधुनिक शिक्षा केंद्रों में बदलना है। इससे छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर सुविधाएं और नए अवसर मिल सकेंगे। 182 साल पुराने इस संस्थान का कायाकल्प होने के बाद यह बिहार के प्रमुख मॉडल स्कूलों में शामिल हो सकता है और नई पीढ़ी के छात्रों के लिए शिक्षा का बेहतर केंद्र बन सकता है।

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