पंचायती राज निदेशालय की ओर से इस संबंध में प्रस्ताव तैयार कर विभाग के प्रमुख सचिव को भेजा गया है। वर्तमान जिला पंचायत अध्यक्षों का कार्यकाल 11 जुलाई और ब्लॉक प्रमुखों का कार्यकाल 19 जुलाई को पूरा होने वाला है। ऐसे में चुनाव होने तक पंचायतों के संचालन को लेकर सरकार जल्द फैसला ले सकती है।
ब्लॉक प्रमुख संघ ने रखी मांग
ब्लॉक प्रमुख संघ की ओर से मांग की गई है कि कार्यकाल खत्म होने के बाद मौजूदा ब्लॉक प्रमुखों को ही प्रशासक की जिम्मेदारी दी जाए। संघ के पदाधिकारियों ने इस संबंध में मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्रियों, पंचायती राज मंत्री और अन्य वरिष्ठ नेताओं को पत्र देकर अपनी मांग रखी है।
प्रशासक के अधिकार रहेंगे सीमित
प्रशासक बनाए जाने के बाद पंचायतों के सामान्य कामकाज को जारी रखने की जिम्मेदारी होगी। हालांकि बड़े नीतिगत फैसले लेने के लिए उन्हें संबंधित अधिकारियों से अनुमति लेनी पड़ सकती है। सरकार का उद्देश्य पंचायतों के कामकाज में रुकावट न आने देना है ताकि विकास कार्य और जरूरी प्रशासनिक गतिविधियां जारी रह सकें।
चुनाव तक जारी रहेगु मौजूदा व्यवस्था का असर
अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए भी इस फैसले को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ग्राम पंचायतों में प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने के बाद अब ब्लॉक प्रमुख और जिला पंचायत अध्यक्षों को लेकर भी संभावनाएं बढ़ गई हैं। हालांकि अंतिम फैसला सरकार की मंजूरी और नियमों के आधार पर ही होगा।
पहले एसडीएम और डीएम को मिलती थी जिम्मेदारी
अब तक चुनाव में देरी होने पर क्षेत्र पंचायतों में उप जिलाधिकारी और जिला पंचायतों में जिलाधिकारी को प्रशासक नियुक्त किया जाता रहा है। हालांकि इस बार ग्राम पंचायतों में निवर्तमान प्रधानों को जिम्मेदारी देकर एक अलग व्यवस्था अपनाई गई है। अगर सरकार ब्लॉक प्रमुखों और जिला पंचायत अध्यक्षों को प्रशासक नियुक्त करती है तो यह प्रदेश में एक नई व्यवस्था होगी।

0 comments:
Post a Comment