कृषि विभाग का कहना है कि इस बदलाव का उद्देश्य खाद वितरण में पारदर्शिता लाना और सभी पात्र किसानों तक समय पर उर्वरक पहुंचाना है। कई बार खाद की कमी या भीड़ की वजह से किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ता है, जिसे देखते हुए यह डिजिटल व्यवस्था लागू की जा रही है।
एप पर दर्ज करनी होगी खेती की जानकारी
किसानों को मोबाइल एप में अपनी जमीन, फसल और जरूरत के अनुसार उर्वरक की जानकारी भरनी होगी। किसान यूरिया, डीएपी या एनपीके जैसी खाद की मात्रा का चयन कर सकेंगे। इसके बाद उन्हें आसपास के खाद विक्रेताओं की जानकारी मिलेगी और वे अपनी सुविधा के अनुसार दुकान चुन पाएंगे। बुकिंग पूरी होने के बाद किसान को एक डिजिटल टोकन या क्यूआर कोड मिलेगा। इसी के जरिए किसान निर्धारित विक्रेता से खाद प्राप्त कर सकेगा।
सभी तरह के किसानों को मिलेगा मौका
नई प्रणाली में अलग-अलग किसानों के लिए सुविधा रखी गई है। जिन किसानों के पास किसान पहचान पत्र है, वे सत्यापन के बाद आवेदन कर सकेंगे। वहीं बिना किसान आइडी वाले किसान भी अपनी जमीन की जानकारी देकर प्रक्रिया में शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा किराए पर खेती करने वाले और बटाईदार किसानों को भी नियमों के अनुसार खाद उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।
किसानों की मदद के लिए हेल्पलाइन
नई व्यवस्था को लेकर किसी भी तरह की परेशानी होने पर किसान सहायता नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं। कृषि विभाग ने किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए हेल्पडेस्क की सुविधा भी उपलब्ध कराई है। इस नई पहल से खाद वितरण व्यवस्था को बेहतर बनाने की कोशिश की जा रही है, ताकि किसानों को सही समय पर जरूरत के अनुसार उर्वरक मिल सके और खेती के काम में रुकावट न आए।
किसान की जगह दूसरा व्यक्ति भी ले सकेगा खाद
अगर किसी कारण से किसान खुद दुकान तक नहीं पहुंच पाता है तो वह अपने परिवार के सदस्य या किसी भरोसेमंद व्यक्ति को अधिकृत कर सकता है। सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद वह व्यक्ति किसान की ओर से खाद ले सकेगा।
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