यूपी सरकार ने दी खुशखबरी, पेंशन 1000 से बढ़कर 1500 रुपये प्रति माह

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने दिव्यांगजनों के लिए कई महत्वपूर्ण फैसलों पर सैद्धांतिक सहमति जताई है। इनमें सबसे बड़ी राहत मासिक दिव्यांग पेंशन को 1,000 रुपये से बढ़ाकर 1,500 रुपये करने का प्रस्ताव है। इसके अलावा आरक्षण, मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल वितरण, कृत्रिम अंगों के लिए अनुदान और अन्य कल्याणकारी योजनाओं को भी विस्तार देने की घोषणा की गई है।

पेंशन में 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी का फैसला

वर्तमान में उत्तर प्रदेश में पात्र दिव्यांगजनों को 1,000 रुपये प्रति माह पेंशन दी जाती है। अब सरकार ने इसे बढ़ाकर 1,500 रुपये प्रति माह करने पर सैद्धांतिक सहमति दे दी है। यदि यह निर्णय लागू होता है तो दिव्यांगजनों को हर महीने 500 रुपये अतिरिक्त सहायता मिलेगी, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूती मिल सकती है।

दुकानों के आवंटन में बढ़ेगा आरक्षण

सरकार ने विकास प्राधिकरणों, यूपीडा (UPIDA) और औद्योगिक विकास प्राधिकरणों की दुकानों के आवंटन में दिव्यांगजनों का आरक्षण 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 5 प्रतिशत करने पर भी सहमति जताई है। इस फैसले का उद्देश्य दिव्यांगजनों को स्वरोजगार के अधिक अवसर उपलब्ध कराना है। इसके अलावा खाद्य एवं रसद विभाग की उचित दर की दुकानों में भी दिव्यांगजनों के लिए आरक्षण देने के प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है।

हर जिले में मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल

सरकार ने घोषणा की है कि प्रदेश के हर जिले में 15 पात्र दिव्यांगजनों को मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल उपलब्ध कराई जाएगी। इससे गंभीर रूप से दिव्यांग लोगों को आवागमन में काफी सुविधा मिलेगी और वे अपने दैनिक कार्य अधिक आसानी से कर सकेंगे।

कृत्रिम अंगों के लिए बढ़ाई गई सहायता

सरकार ने कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरणों के लिए मिलने वाले अनुदान की सीमा भी बढ़ा दी है। अब 80 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांगता वाले 16 वर्ष या उससे अधिक आयु के पात्र व्यक्तियों को 25,000 रुपये तक का अनुदान दिया जाएगा, जिससे वे आवश्यक सहायक उपकरण आसानी से प्राप्त कर सकें।

दुकान शुरू करने के लिए मिलेगा अनुदान

दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से दुकान निर्माण और संचालन के लिए दी जाने वाली सहायता को भी और प्रभावी बनाया गया है। दुकान निर्माण के लिए 20,000 रुपये, दुकान संचालन के लिए 10,000 रुपये। सरकार ने इस सहायता राशि को पूरी तरह अनुदान के रूप में उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है, जिससे लाभार्थियों पर किसी प्रकार का वित्तीय बोझ न पड़े।

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