कम स्टांप शुल्क देने पर लगेगा जुर्माना
नई व्यवस्था के अनुसार यदि जांच में यह पाया जाता है कि रजिस्ट्री के समय संपत्ति का मूल्य जानबूझकर कम दर्शाया गया था, तो जितनी राशि का स्टांप शुल्क कम जमा किया गया होगा, उतनी ही राशि के बराबर 100 प्रतिशत जुर्माना भी देना होगा। यानी कम शुल्क जमा करने की स्थिति में आर्थिक दंड भी भुगतना पड़ेगा।
अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय होगी
सरकार ने केवल खरीदारों और विक्रेताओं पर ही नहीं, बल्कि संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही भी तय करने का प्रावधान किया है। यदि किसी स्तर पर लापरवाही या नियमों का उल्लंघन सामने आता है, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
संदेह होने पर होगी बाजार मूल्य की जांच
प्रस्तावित कानून के अनुसार यदि निबंधन अधिकारी को यह संदेह होता है कि संपत्ति का वर्गीकरण, क्षेत्रफल, निर्माण या बाजार मूल्य सही नहीं बताया गया है, तो वह सीधे रजिस्ट्री पूरी नहीं करेगा। ऐसे मामलों को आगे की जांच के लिए सक्षम अधिकारी, जैसे समाहर्ता (कलेक्टर) या सहायक निबंधन महानिरीक्षक, के पास भेजा जाएगा।
सही मूल्यांकन के बाद ही पूरी होगी प्रक्रिया
सक्षम अधिकारी संपत्ति का वास्तविक बाजार मूल्य निर्धारित करेंगे और उसके आधार पर देय स्टांप शुल्क तय किया जाएगा। आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही रजिस्ट्री आगे बढ़ेगी। इससे संपत्ति के मूल्यांकन में पारदर्शिता आएगी और सरकार को राजस्व की हानि रोकने में मदद मिलेगी।
सरकार द्वारा पारदर्शी व्यवस्था लाने की तैयारी
सरकार का उद्देश्य रजिस्ट्री प्रक्रिया में गलत मूल्यांकन, स्टांप शुल्क की चोरी और राजस्व नुकसान को रोकना है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद जमीन और फ्लैट की खरीद-बिक्री में सही बाजार मूल्य दर्शाने पर अधिक जोर रहेगा। इससे ईमानदार लेनदेन को बढ़ावा मिलेगा और विवादों की संभावना भी कम होने की उम्मीद है।
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