जिलाधिकारियों को मिली बड़ी जिम्मेदारी
नई व्यवस्था के तहत अब प्रत्येक जिले के जिलाधिकारी (डीएम) अपने-अपने प्रखंडों में ग्राम पंचायतों के परिसीमन की प्रक्रिया पूरी करेंगे। यह कार्य राज्य निर्वाचन आयोग की निगरानी में किया जाएगा, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और निर्धारित नियमों के अनुरूप संपन्न हो सके।
2011 की जनगणना बनेगी आधार
सरकार ने स्पष्ट किया है कि नए ग्राम पंचायतों के गठन और सीमांकन के लिए 2011 की जनगणना के आंकड़ों को आधार बनाया जाएगा। प्रत्येक प्रखंड को एक इकाई मानकर पंचायत क्षेत्रों का निर्धारण किया जाएगा, जिससे जनसंख्या के अनुसार पंचायतों का संतुलित गठन संभव हो सके।
गांवों के विभाजन पर रहेगा ध्यान
नई व्यवस्था में यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी गांव को अनावश्यक रूप से अलग-अलग पंचायतों में न बांटा जाए। केवल ऐसी स्थिति में गांव का विभाजन किया जाएगा, जब जनसंख्या या प्रशासनिक आवश्यकता के कारण एक से अधिक ग्राम पंचायत बनाना जरूरी हो। इससे ग्रामीणों को प्रशासनिक सुविधाएं बेहतर तरीके से मिल सकेंगी।
पंचायत मुख्यालय तय करने के मानदंड
यदि किसी ग्राम पंचायत में एक से अधिक गांव शामिल होंगे, तो सामान्य रूप से सबसे अधिक आबादी वाले गांव को पंचायत मुख्यालय बनाया जाएगा। वहीं जिन क्षेत्रों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़ा वर्ग की आबादी प्रमुख होगी, वहां सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए मुख्यालय का चयन किया जा सकेगा।
प्राकृतिक सीमाओं को मिलेगी प्राथमिकता
पंचायत क्षेत्रों की सीमाएं तय करते समय प्राकृतिक सीमाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके अलावा सड़क, रेलवे लाइन और अन्य सार्वजनिक स्थलों को भी सीमा निर्धारण का आधार बनाया जा सकता है, ताकि पंचायत की सीमाएं स्पष्ट और विवाद रहित रहें।
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