क्यों कराया जाएगा स्पेशल टीईटी?
सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में देशभर के सभी शिक्षकों के लिए टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य कर दिया था। बाद में पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने टीईटी पास करने की समय-सीमा दो वर्ष से बढ़ाकर तीन वर्ष कर दी, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि आगे समय बढ़ाने की मांग स्वीकार नहीं की जाएगी। इसी आदेश का पालन करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार अब विशेष टीईटी आयोजित कराने की तैयारी कर रही है।
1.40 लाख से अधिक शिक्षकों को अवसर
शासन के अनुसार, इस निर्णय का लाभ बड़ी संख्या में कार्यरत शिक्षकों को मिलेगा। प्राथमिक विद्यालयों के लगभग 64,062 शिक्षक, उच्च प्राथमिक विद्यालयों के करीब 76,256 शिक्षक। यानी कुल मिलाकर 1.40 लाख से अधिक शिक्षकों को स्पेशल टीईटी में शामिल होने का अवसर मिलने की संभावना है।
विशेष शिक्षकों के लिए भी अलग परीक्षा
सरकार ने विशेष शिक्षकों के लिए भी अलग व्यवस्था करने का फैसला किया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप 5,352 विशेष शिक्षक पद पहले ही चिन्हित किए जा चुके हैं। इन पदों में संविदा और डेलीवेज पर कार्यरत शिक्षकों के चयन की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए भी स्पेशल टीईटी आयोजित की जाएगी। अनुमान है कि इस श्रेणी में करीब 2,500 विशेष शिक्षक और सहायक अध्यापक परीक्षा में शामिल होंगे।
आयोग तैयार करेगा पूरी कार्ययोजना
शासन ने उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग से दोनों श्रेणियों के लिए परीक्षा की विस्तृत कार्ययोजना, परीक्षा कार्यक्रम और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं का प्रस्ताव जल्द उपलब्ध कराने को कहा है। कार्ययोजना मिलने के बाद परीक्षा की तिथि और आवेदन प्रक्रिया से संबंधित जानकारी जारी की जाएगी।
साल में दो बार टीईटी कराने पर जोर
सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को यह भी सलाह दी है कि टीईटी परीक्षा समय-समय पर आयोजित की जाए और यदि संभव हो तो हर छह महीने के अंतराल पर वर्ष में दो बार परीक्षा कराई जाए। इससे पात्र अभ्यर्थियों को समय पर अवसर मिल सकेगा और शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया भी प्रभावित नहीं होगी।

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